Report: Ram Yadav
Vidisha : जननी सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम दावों के बीच विदिशा जिले के पठारी से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ देर रात एक प्रसूता को एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण सड़क पर ही प्रसव (डिलीवरी) के लिए मजबूर होना पड़ा। परिजनों ने घंटों तक सरकारी मदद का इंतजार किया, लेकिन जब ‘108’ सेवा नहीं पहुँची, तो मजबूरन परिजन महिला को पैदल ही अस्पताल ले जाने लगे, पर रास्ते में ही प्रसव हो गया।

एम्बुलेंस का लंबा इंतजार और सिस्टम की बेरुखी
Vidisha बताया जा रहा है कि महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद परिजनों ने कई बार एम्बुलेंस के लिए फोन लगाया। करीब 3 घंटे तक एम्बुलेंस का इंतजार किया गया, लेकिन मदद के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलते रहे। जब देर रात 3:00 बजे तक कोई गाड़ी नहीं पहुँची, तो परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और वे प्रसूता की जान जोखिम में डालकर उसे किसी तरह अस्पताल ले जाने के लिए घर से निकल पड़े।
सड़क पर प्रसव: त्रिपाल की ओट में कटी रात
Vidisha अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। मजबूरी में सड़क के किनारे ही प्रसव कराना पड़ा। इस दौरान मानवता दिखाते हुए स्थानीय चौकीदार की पत्नी आगे आईं और उन्होंने ही प्रसव संपन्न कराया। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रसव के बाद भी जच्चा और बच्चा करीब 2 से 3 घंटे तक सड़क पर ही पड़े रहे। ठंड से बचने के लिए परिजनों ने सड़क पर ही त्रिपाल तान दिया, ताकि नवजात और माँ को सुरक्षित रखा जा सके।
सुरक्षा और स्वास्थ्य पर उठते बड़े सवाल
Vidisha यह घटना जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देशों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में एम्बुलेंस का न पहुंचना प्रशासन की बड़ी विफलता को दर्शाता है। जच्चा और बच्चा घंटों तक असुरक्षित परिस्थितियों में सड़क पर रहे, जिससे संक्रमण और ठंड का खतरा बना रहा। फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से जवाबदेही तय होना बाकी है।





