Report: Devendra Jaiswal
Indore इंदौर की सेंट्रल जेल में 26 जनवरी के अवसर पर आजादी की एक नई सुबह देखने को मिली। जेल प्रशासन ने गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर अच्छे आचरण वाले 9 कैदियों को समय से पूर्व रिहा कर दिया। ये सभी कैदी कभी संगीन अपराधों के चलते सलाखों के पीछे पहुंचे थे, लेकिन आज वे एक बेहतर इंसान बनकर बाहर निकले हैं।

अपराध बोध ने बदला जीवन: ‘शंकर’ से बने ‘साधु’
Indore रिहा होने वाले कैदियों में सबसे चर्चा शंकर नामक व्यक्ति की रही। जेल अधीक्षक के अनुसार, शंकर जमीन विवाद में हुई एक हत्या के मामले में सजा काट रहे थे। जेल की चारदीवारी के भीतर उन्हें अपने कृत्य पर गहरा पछतावा हुआ, जिसके बाद उन्होंने अध्यात्म का मार्ग चुन लिया। वर्षों तक पूजा-पाठ और सात्विक जीवन जीने के बाद, आज शंकर एक साधु के वेश में जेल से बाहर आए। उन्होंने संकल्प लिया है कि अब वे अपना शेष जीवन संत की तरह समाज सेवा में व्यतीत करेंगे।

सुधार का संदेश: ‘एक गलती ने छीन लिए 15 साल’
Indore रिहा हुए एक अन्य कैदी राहुल ने समाज और युवाओं के लिए एक भावुक संदेश दिया। हत्या के मामले में जेल की सजा काट चुके राहुल ने बाहर निकलते ही कहा कि आवेश में आकर किया गया कोई भी गलत कृत्य पूरे जीवन को बर्बाद कर सकता है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि उनकी एक गलती ने जीवन के कीमती 15 साल छीन लिए। राहुल ने अन्य लोगों से अपील की है कि वे कभी भी कानून हाथ में न लें।
आचरण के आधार पर शासन का निर्णय
Indore जेल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इन सभी कैदियों की रिहाई उनके पिछले कई वर्षों के उत्कृष्ट व्यवहार (Good Conduct) के आधार पर की गई है। जेल के अंदर इन कैदियों ने न केवल नियमों का पालन किया, बल्कि विभिन्न रचनात्मक कार्यों में भी भाग लिया। सेंट्रल जेल प्रबंधन की सिफारिश के बाद राज्य सरकार ने उनकी शेष सजा माफ कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर प्रदान किया है।
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