BY
Yoganand Shrivastava
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एक बार फिर आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन पीओके में नए सिरे से ट्रेनिंग कैंप सक्रिय कर रहे हैं।
शीर्ष आतंकी नेताओं की मौजूदगी
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कुख्यात आतंकी अब्दुर रऊफ, रिजवान हनीफ और अबू मूसा हाल ही में मीरपुर क्षेत्र में आयोजित एक बैठक को संबोधित करते देखे गए। इस बैठक में बड़ी संख्या में आतंकियों की भागीदारी बताई जा रही है।
महिला और बच्चों की भागीदारी से चिंता
चौंकाने वाली बात यह है कि इन आतंकी कैंपों में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल किए जा रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि आतंकी संगठन आने वाली पीढ़ी को भी कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं।
जनवरी से विशेष ट्रेनिंग कैंप की तैयारी
जानकारी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद पहली जनवरी 2026 से मीरपुर, पीओके में सात दिवसीय विशेष ‘तरबिया’ प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही गढ़ी हबीबुल्लाह और बालाकोट जैसे इलाकों में सार्वजनिक रैलियों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।
लश्कर के नए कैंप भी निर्माणाधीन
लश्कर-ए-तैयबा ने भी पाकिस्तान और पीओके के कई इलाकों में अपने ट्रेनिंग कैंपों का विस्तार शुरू कर दिया है। लोअर दीर क्षेत्र में स्थित ‘जिहाद-ए-अक्सा’ नामक प्रशिक्षण केंद्र पिछले कुछ महीनों से सक्रिय बताया जा रहा है।
कश्मीर टाइगर्स को बताया फ्रंट संगठन
जैश-ए-मोहम्मद ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि ‘कश्मीर टाइगर्स’ उसका ही एक फ्रंट संगठन है, जिसका इस्तेमाल वह आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
गौरतलब है कि अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
कई ठिकाने किए गए थे तबाह
ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े ट्रेनिंग कैंप और लॉन्च पैड पूरी तरह नष्ट कर दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया गया था।





