Isa Ahmad
REPORT- NIJAM ALI
करोड़ों की सड़क कुछ ही दिनों में गड्ढों में तब्दील
PILIBHIT: जनपद में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घुंघचाई से दियोरिया कला को जोड़ने वाली सड़क, जो पूरनपुर और बीसलपुर तहसील को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, महज कुछ ही दिनों में पूरी तरह बदहाल हो गई है। करीब 3 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से बनी यह सड़क अब जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
नई सड़क, घटिया निर्माण की भेंट
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क का निर्माण पूरा होते ही इसकी परतें पापड़ की तरह उखड़ने लगीं। डामर और गिट्टी जगह-जगह से निकल गई, जिससे सड़क पर चलना खतरनाक हो गया है। कई हिस्सों में तो गड्ढे इतने गहरे हैं कि वाहन पलटने का खतरा बना रहता है।
जंगल के अंदर का हिस्सा सबसे ज्यादा बदहाल
घुंघचाई–दियोरिया मार्ग का जो हिस्सा जंगल के अंदर से गुजरता है, वह सबसे अधिक जर्जर हालत में है। यहां सड़क कट चुकी है और लंबे समय से मरम्मत नहीं कराई गई। बारिश के बाद हालात और भी भयावह हो गए हैं, जिससे चौपहिया और दोपहिया वाहनों का आवागमन लगभग ठप हो गया है।
ग्रामीणों का जीवन प्रभावित
सड़क की बदहाली का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और मरीजों पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं मरीजों को अस्पताल तक पहुंचना जोखिम भरा हो गया है। आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
PWD पर भ्रष्टाचार के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार किया गया है। मानकों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ, जिसकी वजह से करोड़ों की लागत से बनी सड़क कुछ ही दिनों में जवाब दे गई। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका सामने आ सकती है।
जवाबदेही तय करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घुंघचाई से दियोरिया जाने वाले इस मार्ग की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और सड़क का दोबारा मानक के अनुसार निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी लापरवाही और भ्रष्टाचार यूं ही चलता रहेगा।
सड़क की यह बदहाली न सिर्फ PWD विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि जनहित के पैसों की खुली लूट की कहानी भी बयां करती है।





