BY: Yoganand Shrivastva
Ujjain news: उज्जैन की अदालत ने नौ वर्ष पुराने नकली दवा प्रकरण में मंगलवार को सख्त निर्णय सुनाया। अदालत ने नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल चार आरोपियों को दोषी मानते हुए प्रत्येक को तीन वर्ष के कारावास और छह लाख रुपये के अर्थदंड की सजा दी है।
मामले की पृष्ठभूमि
खाद्य एवं औषधि विभाग को वर्ष 2016 में सिमको ऑर्गेनिक्स के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर 21 सितंबर 2016 को विभाग के संयुक्त जांच दल ने नागझिरी क्षेत्र स्थित इकाई पर छापा मारा था।
जांच में सामने आई गड़बड़ियां
जांच के दौरान पाया गया कि मुख्य आरोपी संतोष कुमार धींग के पास एलोपैथिक दवाओं के निर्माण का वैध लाइसेंस नहीं था। तलाशी में पैकिंग मशीन और करीब 2.6 किलोग्राम प्रिंटेड एल्यूमिनियम लेबल बरामद किए गए, जिनका उपयोग नकली दवाओं की पैकिंग में किया जा रहा था।
अन्य आरोपियों की भूमिका
- राजेन्द्र शर्मा के माध्यम से इंदौर की एक इकाई में दवाओं का निर्माण कराया जा रहा था।
- प्रवीण शाह द्वारा नियमों के विपरीत जांच रिपोर्ट जारी की गई।
- शांतिलाल के जरिए इन नकली दवाओं की बिक्री की गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 24 लाख रुपये बताई गई।
अदालत का निर्णय
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और अंतिम तर्कों के आधार पर चारों आरोपियों को औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया। सभी को तीन वर्ष का कारावास और छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अभियोजन की पैरवी
इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक द्वारा प्रभावी पैरवी की गई, जबकि विभागीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त रहा।
यह फैसला नकली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है, जिससे जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत हुआ है।





