BY: Yoganand Shrivastva
पाकिस्तान में सत्ता को लेकर विवाद अत्यंत तेज़ हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कहां हैं, इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। इसके चलते देश में तरह-तरह की आशंकाएं बढ़ती जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर भी कई तरह की अटकलें लग रही हैं।
जर्नलिस्ट का दावा– घटनाओं की टाइमिंग संदिग्ध
पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार आस्मा शिराज़ी का कहना है कि मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं। नवाज़ शरीफ़ के बयान, पीएम शहबाज़ शरीफ़ का अचानक बहरीन और फिर लंदन जाना, और महत्वपूर्ण निर्णयों में देरी—ये सब संकेत देते हैं कि देश के भीतर कुछ गंभीर उथल-पुथल चल रही है।
आसिम मुनीर पर चारों ओर से दबाव
पाकिस्तान में 27 नवंबर को CDF से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी होना था, लेकिन अब तक निर्णय अटका हुआ है। कानून मंत्री आज़म नज़ीर तरार ने इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री पर डाल दी। शहबाज़ शरीफ़ लंदन से लौट तो आए, पर इस्लामाबाद न जाकर सीधे लाहौर चले गए, जबकि मुनीर राजधानी में उनका इंतज़ार कर रहे हैं।
. इमरान खान पर संसद में हंगामा, सरकार का दावा—क़ैदी 804 सुरक्षित
इमरान खान की मौजूदगी को लेकर संसद में तीखी बहस जारी है। कानून मंत्री तरार ने बयान दिया कि क़ैदी नंबर 804 को किसी तरह का खतरा नहीं है। इसके बावजूद इमरान समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी नाराज़गी का निशाना सीधे सेना प्रमुख मुनीर हैं।
मुनीर की प्रतिष्ठा पर असर—दावा
जानकारों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों ने आसिम मुनीर की छवि को चोट पहुंचाई है—न सिर्फ पाकिस्तान में बल्कि विदेशों में भी। यहां तक कि उनके खुद के अफसरों में भी बेचैनी देखी जा रही है। आरोप यह भी है कि जिस राजनीतिक प्रबंधन में मुनीर ने भूमिका निभाई, वही अब उनके लिए समस्या खड़ी कर रहा है।
नवाज़ शरीफ़ पर आरोप—मुनीर को दी कठोर शर्तें
सूत्रों का कहना है कि नवाज़ शरीफ़ ने मुनीर के सामने साफ-साफ शर्त रखी है कि इमरान खान को किनारे किया जाए और उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाए, तभी CDF का नोटिफिकेशन आगे बढ़ेगा। इसके चलते पूरा मामला और उलझ गया है।
CDF पर सेना में असहमति, फैसला उलटा पड़ गया
पूर्व मंत्री मिर्ज़ा शहज़ाद के अनुसार, CDF बनाने का फैसला जल्दबाज़ी में लिया गया था। परिणामस्वरूप अन्य सेनाओं में असंतोष पैदा हो गया है, जिससे नोटिफिकेशन रुक गया है। आरोप है कि शहबाज़ शरीफ़ सरकार इमरान खान को शीघ्र निपटाना चाहती थी और मुनीर को उसका माध्यम बना दिया।
नतीजा– पाकिस्तान का सत्ता संकट और गहरा
राजनीतिक अस्थिरता, सेना के भीतर असहमति और पूर्व पीएम की अज्ञात स्थिति—इन सबने पाकिस्तान को गहरे तनाव में डाल दिया है, और फिलहाल हालात सुधरते नज़र नहीं आ रहे।





