BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल: सांसद आलोक शर्मा ने आईएएस संतोष वर्मा द्वारा दिए गए विवादित बयान पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने दिल्ली स्थित संसद भवन में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर लिखित शिकायत सौंपी। सांसद का कहना है कि वर्मा का सार्वजनिक मंच पर दिया गया बयान आईएएस सेवा नियमों के विरुद्ध है और इससे सामाजिक सौहार्द व संवैधानिक मूल्यों को ठेस पहुंचती है।
रीवा सांसद भी पहले उठा चुके हैं मामला
इससे पहले रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा भी वर्मा के चयन और प्रमाणीकरण पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि वर्मा का चयन अनुसूचित जाति की जगह अनुसूचित जनजाति वर्ग में किया गया था, जिसे वर्ष 2021 में अदालत ने गलत माना था। सांसद मिश्रा के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद वर्मा को पद और वेतन लाभ नहीं मिलना चाहिए था।
पिछले मामलों में भी वर्मा का नाम विवादों में
रीवा सांसद ने यह भी बताया कि वर्मा का नाम पहले अदालत की अवमानना, अमर्यादित भाषा और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे मामलों में भी आया है, जिनके चलते उन्हें कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ी थी। उनके अनुसार, किसी वर्ग विशेष को लेकर दिया गया वर्मा का ताजा बयान न सिर्फ अपमानजनक है बल्कि संविधान की भावना के भी विपरीत है।
प्रशासनिक नैतिकता पर उठे सवाल
सांसदों का कहना है कि केंद्र सरकार सामाजिक सौहार्द और जातीय समरसता को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है, ऐसे में वर्मा का बयान प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ है और सरकारी पहलों को भी प्रभावित करता है।
मांगें—जांच और कार्रवाई
रीवा सांसद मिश्रा ने 28 नवंबर 2025 को लिखे पत्र में तीन प्रमुख मांगें रखी थीं—

- विवादित टिप्पणी पर आईएएस आचरण नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
- अनुसूचित जाति के स्थान पर अनुसूचित जनजाति से हुए चयन की जांच कराई जाए।
- अदालत के आदेश और चयन प्रक्रिया की खामियों को ध्यान में रखते हुए वर्मा की पदोन्नति की समीक्षा की जाए।
यह पूरा मामला अब केंद्र तक पहुंच चुका है, और दोनों सांसदों ने प्रशासनिक अनुशासन व सामाजिक संवेदनशीलता के आधार पर कठोर कदम उठाने की मांग की है।





