BY: Yoganand Shrivastva
दूरसंचार विभाग द्वारा सभी नए मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का निर्देश जारी होते ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इस ऐप को साइबर अपराध और धोखाधड़ी रोकने के उद्देश्य से विकसित किया गया है, और आदेश के तहत फोन चालू करते ही यह ऐप उपयोगकर्ता को दिखाई देना अनिवार्य होगा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस फैसले को नागरिकों की निजता में दखल बताते हुए कहा कि यह लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है और जनता अपने फोन की निगरानी बर्दाश्त नहीं करेगी। उनका कहना है कि धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर हर नागरिक की गतिविधि पर नजर रखना उचित नहीं है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी अनिवार्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे ऐप तभी स्वीकार्य हैं जब लोगों पर कोई दबाव न हो और वे स्वेच्छा से इन्हें डाउनलोड करें। उन्होंने सरकार से मांग की कि फैसले के पीछे की सोच जनता के सामने स्पष्ट की जाए।
इसके विपरीत, बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह ऐप पारदर्शी है और साइबर फ्रॉड से लड़ने के लिए सरकार की यह पहल सराहनीय है। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राजीव शुक्ला और केसी वेणुगोपाल ने इस आदेश को खतरनाक और निजता के अधिकार पर चोट बताते हुए सरकार पर निगरानी बढ़ाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यह कदम नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।





