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डिजिटल अरेस्ट स्कैम की जांच अब CBI करेगी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया विशेष आदेश

By: Yoganand Shrivastva

देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट घोटालों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इन सभी मामलों की जांच CBI को सौंप दी है। अदालत ने कहा कि यह अपराध अत्यंत गंभीर है और इसके लिए अलग से त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। इसी कारण, अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों की तुलना में CBI को प्राथमिकता के साथ सबसे पहले डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की जांच करने का निर्देश दिया गया है।

CBI को मिली विशेष शक्तियां

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि CBI को बैंकिंग सिस्टम में शामिल उन सभी लोगों की जांच करने का पूर्ण अधिकार होगा, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई जाती है। जहां भी इन स्कैम में उपयोग किए गए बैंक अकाउंट सामने आएंगे, वहां संबंधित बैंक अधिकारियों की जांच CBI स्वतंत्र रूप से करेगी।

RBI को नोटिस, AI आधारित प्रणाली पर पूछा सवाल

अदालत ने इस मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को भी पक्षकार बनाया और नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा कि बैंक खातों की पहचान और अपराध से कमाई गई रकम को फ्रीज करने के लिए AI और मशीन लर्निंग सिस्टम कब लागू किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने RBI से इस पर विस्तृत जवाब मांगा है।

IT इंटरमीडियरी रूल्स के तहत सभी एजेंसियों को सहयोग का निर्देश

कोर्ट ने आदेश दिया कि IT इंटरमीडियरी रूल्स 2021 के तहत सभी अधिकारी और संस्थाएं CBI को पूरा सहयोग दें। जिन राज्यों ने CBI को सामान्य अनुमति नहीं दे रखी है, उन्हें भी निर्देश दिया गया कि वे कम से कम डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में जांच की अनुमति दें। जरूरत पड़ने पर CBI को इंटरपोल से मदद लेने की भी अनुमति होगी।

टेलीकॉम कंपनियों से भी मांगा प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम विभाग को निर्देश दिया कि एक ही नाम पर कई सिम जारी करने और सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रपोज़ल तैयार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि टेलीकॉम कंपनियों को सिम जारी करने की प्रक्रिया और सख्त करनी होगी।

राज्यों को साइबर क्राइम केंद्र खोलने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा कि वे जल्द से जल्द साइबर क्राइम सेंटर स्थापित करें। यदि इसमें कोई अड़चन आती है तो उसकी जानकारी सीधे सुप्रीम कोर्ट को दी जाए। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया गया कि IT Act 2021 के तहत दर्ज हर FIR को CBI को सौंपा जाए।

सीनियर सिटिज़न्स सबसे बड़े शिकार

CJI ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर मामलों में सीनियर सिटिज़न्स को निशाना बनाया गया है। कई राज्यों में इस प्रकार के असंख्य मामले दर्ज हुए हैं।

दो हफ्ते बाद अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेने के बाद कई पीड़ित सामने आए और याचिकाएं दायर की गईं। अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें कोर्ट CBI की प्रगति रिपोर्ट भी देखेगा।

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