बिहार में बहार, रील से रोजगार : जाति पर हावी रोजगारी, कौन मारेगा बाजी ?

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Spring in Bihar, employment from reel: Caste dominates employment, who will win?

केंद्र सरकार की डिजिटल नीतियों की वजह से देश में घर-घर इंटरनेट पहुंचा

concept: rp shrivastava, report: vijay nandan

बेशक, बिहार की राजनीति में जाति ही सबसे बड़ी सच्चाई है, लेकिन इस बार हवा बदली बदली सी लग रही है। जुबानी जंग इस कदर तेज है कि मुद्दे हावी होते दिख रहे हैं। तो क्या इस बार बिहार जाति छोड़कर रोजगार के मुद्दे पर वोट करेगा? पीएम मोदी ने एक रैली में कहा कि आज का युवा रील से रोजगार पा रहा है, वैसे युवाओं को लुभाने के लिए महागठबंधन और एनडीए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं.. लेकिन इसी बीच चेहरों की जंग और ‘नायक बनाम खलनायक’ और गब्बरसिंह का मुद्दा भी छाया हुआ है..जिससे सियासी तकरार और बढ़ गई है। स्पेशल रिपोर्ट में इन्हीं मुददों पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट के आखिर में यू-ट्यूब वीडियो जरूर देखिए…  

जैसे-जैसे बिहार चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है..नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है..अब तक के चुनावों में देखा गया है कि बिहार में जातिगत समीकरण हावी हुए और मुद्दे गौण कर दिए गए..लेकिन इस बार का चुनाव मुद्दों का चुनाव लग रहा है..मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है..इसलिए घोषणाओं का अंबार भी दोनों तरफ से लग रहा है..खास बात ये है कि इस बार युवा वोटर पर सबका का फोकस है..और युवाओं को लुभाने रोजगार का दांव चला जा रहा है.. आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव ने हर घर को नौकरी देने का दांव खेला..और पंचायत प्रमुखों को पेंशन देने और 50 लाख का बीमा कराने का वादा किया है.. तो दूसरी तरफ एनडीए के मुख्यमंत्री नीतीश ने राज्य की आधी आबादी को साधने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू कर दी है..और 10-10 रुपए की 5 किस्त जारी कर दी है..इतना ही नहीं अगली सरकार बनने पर एनडीए सरकार ने एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा कर रही है..रोजगार के वादों इरादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मधुबनी की सभा में रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर अपनी सरकार की डिजीटल नीति का जिक्र किया।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार के नौजवानों ने सस्ते डेटा का सबसे ज्यादा लाभ उठाया है। वहां रील बन रही हैं। सारी क्रिएटिविटी दिख रही है। इसमें BJP और NDA की नीतियों का बहुत बड़ा योगदान है। इंटरनेट से अच्छी कमाई युवा कर रहे हैं।

इस बार बिहार में मुद्दों के चुनाव के बीच चेहरों का चुनाव ने भी जंग को दिलचस्प बना रहा है…महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित गया तो अब तक खामौश बैठे एनडीए के नेताओं को भी कहना पड़ा कि एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे..रोजगार और चेहरों के लेकर चल रहे चुनावी वार पलटवार के बीच आरजेडी ने एक और मुद्दा उछाला.. वो मुद्दा है बिहार का नायक और खलनायक.. दरअसल आरजेडी मुख्यालय पटना के बाहर एक पोस्टर लगाया गया है जिसमें तेजस्वी यादव को बिहार का नायक दर्शाया..फिर क्या था बीजेपी-जेडीयू, जन सुराज के नेता ही नहीं तेजस्वी के बड़े भैया तेज प्रताप ने भी चुटकी लेने में देर नहीं की.

किस नेता ने क्या कहा ..

तेज प्रताप यादव, अध्यक्ष, JJD : तेजस्वी जन नायक नहीं हो सकते, वो जो कुछ भी हैं हमारे पिता की बदौलत हैं

सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री :  जिस व्यक्ति के पिता स्वयं ‘खलनायक’ हों, वह भला ‘नायक’ कैसे हो सकता है? सम्राट चौधरी ने लालू प्रसाद यादव को ‘बिहार का गब्बर सिंह’ करार दिया. उन्होंने याद दिलाया कि लालू यादव कई गंभीर मामलों में आरोपी हैं. सम्राट चौधरी के अनुसार, आपराधिक वाले ऐसे व्यक्ति को नायक बताना वास्तव में शर्मसार करने वाली बात है.

दिलीप जायसवाल, प्रदेशाध्यक्ष, बीजेपी : नायक नहीं, खलनायक हैं वो.. गाना गाते हुए तेजस्वी यादव और राजद पर हमला बोला है. कहा कि- हम एनडीए में पांच पांडव हैं. पांडव के सामने कौरव जो होगा, वो तो खलनायक ही होगा. 

प्रशांत किशोर, प्रमुख, जनसुराज : बिहार को बर्बाद करने वाले लोग अगर नायक हैं तो खलनायक कौन हैं? बिहार की जनता जानती है कि किन लोगों ने बिहार की यह हालत की है।

बेशक, बिहार चुनाव हमेशा से जातीय समीकरणों पर लड़ा जाता रहा है। लेकिन इस बार जुबानी जंग में रोजगार और विकास का मुद्दा जातीय पहचान पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। साफ है, मतदाता अब केवल जाति के नाम पर नहीं, बल्कि अपनी दैनिक समस्याओं, जिसमें रोजगार मुख्य है, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य के समाधान की गारंटी पर वोट करेगा। जिस गठबंधन को इन मुद्दों पर जनता अधिक विश्वसनीय मानेगी, जीत उसी की होगी।

बिहार चुनाव में ये प्रमुख मुद्दे हावी

  • जाति बनाम मुद्दों का चुनाव
  • रील से रोजगार: एनडीए सरकार की नीतियां बड़ा कारण
  • रोजगार: पक्ष-विपक्ष युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वादा कर रहे हैं
  •  पलायन: नौकरी की तलाश में पलायन भी मुद्दा है
  •  विकास और बुनियादी ढांचा: सड़क, बिजली और पेयजल चुनावी वादे
  •  शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा: बेहतर शिक्षण संस्थान और स्वास्थ्य सुविधाएं
  •  ‘वोट चोरी’ या चुनावी धांधली का मुद्दा भी छाया
  •  सुशासन बनाम जंगलराज: कानून व्यवस्था भी बड़ा मुद्दा
  •  भ्रष्टाचार: स्थानीय स्तर पर सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार
  •  जातीय समीकरण: टिकट वितरण में सबने जातीय गणित साधा  

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