Mohit Jain
मध्यप्रदेश में इस बार मानसून की बारिश औसत से 21 प्रतिशत ज्यादा रही। कुल 3 महीने 28 दिन तक बरसी बारिश ने 10 साल में तीसरी सबसे अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बनाया। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिले ऐसे रहे, जहां ‘बहुत ज्यादा’ बारिश दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश वाले जिले

गुना जिले में पूरे सीजन में सबसे ज्यादा 65.7 इंच पानी गिरा, जबकि श्योपुर में औसत से 216.3 प्रतिशत बारिश रिकॉर्ड की गई। शाजापुर में सबसे कम 28.9 इंच (81.1%) बारिश हुई। भोपाल में इस बार औसत से 13 प्रतिशत अधिक पानी गिरा, जिससे बड़ा तालाब, भदभदा और कलियासोत डैम फुल हो गए।
मौसम विभाग का अनुमान और वास्तविक आंकड़े
मौसम विभाग ने पूरे सीजन के लिए 106 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन 15 प्रतिशत अधिक पानी गिरा। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में बारिश लगभग दोगुनी रही। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 50 जिलों में बारिश का कोटा फुल हो गया।

पूर्वी और पश्चिमी संभाग में बारिश का अंतर
प्रदेश में मानसून 16 जून को प्रवेश किया। शुरुआत में पूर्वी संभाग (जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल) आगे थे, लेकिन सितंबर में हुई बारिश से पश्चिमी संभाग (भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल) में औसत से 25 प्रतिशत अधिक पानी गिरा।
उज्जैन और शाजापुर में कोटा पूरा नहीं
हालांकि उज्जैन और शाजापुर में कोटा पूरा नहीं हो सका। मौसम विभाग ने अगले 3 दिन तक दक्षिणी हिस्से में हल्की बूंदाबांदी का अनुमान जताया है। तेज बारिश का कहीं कोई अलर्ट नहीं है।
यह खबर भी पढ़ें: ग्वालियर के गेम जोन में झगड़ा, स्टील रॉड से हमला





