by: vijay yadav
16 October 2026 Panchang : शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी साहस, शक्ति और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। नवरात्रि में भक्त विधि-विधान से पूजा करके माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

पंचांग के अनुसार, इस दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। शुक्रवार का दिन होने के कारण भक्त मां दुर्गा की आराधना, मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक साधना कर सकते हैं। आइए जानते हैं 16 अक्टूबर का पंचांग, तिथि, नक्षत्र और राहुकाल का समय।
16 October 2026 Panchang : 16 अक्टूबर 2026 का पंचांग
दिन: शुक्रवार
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: षष्ठी
नवरात्रि का दिन: छठा दिन
आराध्य देवी: मां कात्यायनी
नक्षत्र: ज्येष्ठा, इसके बाद मूल
योग: शोभन योग, दिल्ली पंचांग के अनुसार
सूर्योदय: लगभग सुबह 6:22 बजे
सूर्यास्त: लगभग शाम 5:50 बजे
नोट: सूर्योदय, सूर्यास्त और अन्य स्थानीय मुहूर्तों में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है।
16 October 2026 Panchang : मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की उपासना की जाती है। धार्मिक परंपरा में उन्हें शक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों पर विजय दिलाने वाली देवी माना गया है। भक्त सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाकर माता को पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित कर सकते हैं।
मां कात्यायनी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप और दुर्गा चालीसा या माता की आरती का पाठ भी किया जाता है। पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और सात्विक भाव को विशेष महत्व दिया जाता है।
16 October 2026 Panchang : 16 अक्टूबर को राहुकाल कब रहेगा?
दिल्ली के पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को राहुकाल का समय लगभग सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक है। राहुकाल की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होती है, इसलिए भोपाल, इंदौर या अन्य शहरों में समय अलग हो सकता है। <Cite refs={[“turn438967search8”]}/>
परंपरागत मान्यता के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक साधना अपनी श्रद्धा के अनुसार की जा सकती है।
16 October 2026 Panchang : बिल्व निमंत्रण का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा की कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में बिल्व निमंत्रण का विशेष महत्व है। इसमें बिल्व वृक्ष को देवी के पूजन और आवाहन से जुड़ी धार्मिक परंपरा के रूप में सम्मान दिया जाता है। इसकी विधि और मुहूर्त अलग-अलग क्षेत्रों की पूजा परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
16 October 2026 Panchang : आध्यात्मिक संदेश: शक्ति के साथ विवेक भी जरूरी
मां कात्यायनी की उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि साहस, आत्मविश्वास और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा से भी जोड़ी जाती है। नवरात्रि का यह दिन भक्तों को अपने भीतर सकारात्मकता विकसित करने, मन को संयमित रखने और अच्छे कर्म करने का संकल्प लेने का अवसर देता है।
डिस्क्लेमर: पंचांग और मुहूर्त संबंधी समय स्थान तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। पूजा के सटीक समय के लिए अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से पुष्टि करें।


