by: vijay nandan
भोपाल: मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने सीहोर स्थित व्ही.आई.टी. भोपाल विश्वविद्यालय को कड़ा “कारण बताओ नोटिस” (Show Cause Notice) जारी किया है। यह नोटिस विश्वविद्यालय परिसर में 25 नवंबर 2025 की रात को हुए विद्यार्थियों के उग्र प्रदर्शन और आगजनी की घटना के बाद एक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर भेजा गया है ।
मुख्य आरोप: मेस में खराब खाना, पीलिया का प्रकोप और ‘तानाशाही’
उच्च शिक्षा विभाग ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति को 07 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। नोटिस में म.प्र. निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2007 की धारा 41(1) का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर धारा 41(2) के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी ।

जांच समिति के प्रतिवेदन में विश्वविद्यालय प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
1 पीलिया का प्रकोप: प्रबंधन ने स्वीकार किया कि 14.11.2025 से 24.11.2025 के बीच 23 छात्र और 12 छात्राएँ पीलिया (Jaundice) से ग्रस्त हुए थे। समिति को पेयजल में दुर्गंध आने की शिकायत भी मिली ।
2 असंतोषजनक मेस सेवाएँ: लगभग 15,000 विद्यार्थियों के रहने वाले छात्रावासों में भोजन और जलपान की गुणवत्ता पर अधिकांश प्रतिक्रियाएँ नकारात्मक पाई गईं। प्रबंधन द्वारा प्रभावी नियंत्रण की कमी पाई गई ।
3 तानाशाही और भय का माहौल: समिति ने पाया कि परिसर को “किले की तरह” रखा गया है, जहाँ प्रबंधन के “स्वयं के कानून” चलते हैं । विद्यार्थियों ने शिकायत करने पर आई-कार्ड जब्त करने, परीक्षा में फेल करने या प्रताड़ित करने की धमकी मिलने की बात कही ।
4 चिकित्सा अधिकारी को रोका: मनमानी का एक बड़ा उदाहरण यह है कि सीहोर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मुख्य प्रवेश द्वार पर 02 घंटे तक रोककर रखा गया ।
5 अव्यवस्था और लीपापोती: स्वास्थ्य केंद्र में पीलिया पीड़ितों का कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं था। प्रशासन पर बीमारी को छुपाने और लीपा-पोती करने का प्रयास करने का आरोप है। केंद्र क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं पाया गया और वहाँ मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का नितांत अभाव है ।
6 स्थिति संभालने में विफलता: विद्यार्थियों के उत्तेजित होने पर वार्डन और गार्ड ने दुर्व्यवहार एवं मारपीट की । प्रबंधन ने बीमार छात्रों को अस्पताल ले जाने के बजाय घर जाने की सलाह दी, जिससे आक्रोश बढ़ा।
7 उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय-सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या?
वी.आई.टी. भोपाल विश्वविद्यालय पर लगे इन गंभीर आरोपों के संबंध में प्रबंधन 07 दिनों के भीतर क्या जवाब देता है, इस पर उच्च शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई निर्भर करेगी ।









