‘चार-पान सुपारी में साजिश’ का सिलसिला, ‘उमंगों’ से भरे सिंघार किसके इशारे पर नाच रहे ?

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The series of 'conspiracy in four betel leaves', collusion between Singhar and Bhupendra!

भूपेंद्र सिंह की चाय-पान सुपारी से सिंघारित लिव-इन पार्टनर की हत्या और रेप के आरोपों में घिरे उमंग सिंघार लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू (EOW) के बाद आयकर विभाग की दहलीज पर क्यों पहुंचे? किसके इशारे पर उमंग सिंघार कार्रवाई कर रहे हैं? कौन है जो उनके पीछे खड़ा है और किसके इशारों पर जांच की आंच पर हाथ सेंकने की कोशिश की जा रही है? पढ़िए ये रिपोर्ट।

किसी भी सरकार को आइना दिखाने के लिए विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष को इससे कोई लेना-देना नहीं है। वह तो पार्टी की रीति-नीति से भी बाहर हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की, जो इन दिनों साठगांठ और साजिश के खेल में लिप्त हैं। उनके खिलाफ लिव-इन पार्टनर की हत्या और तीसरी पत्नी द्वारा बलात्कार के मामले में उच्चतम न्यायालय में न्याय की मांग की गई है, साथ ही राज्य शासन ने भी इस मामले में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। संगीन आरोपों से घिरे उमंग सिंघार को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा संगठन हित में हटाने के लिए एक गोपनीय प्रतिवेदन कांग्रेस अध्यक्ष को भेजने की खबर है। ऐसे में सिंघार अपनी कुर्सी बचाने के लिए चाय-पान की सुपारी साजिश में जुटे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के इशारे पर जांच एजेंसियों के दरवाजे पर दस्तक देकर शह और मात की राजनीति को अंजाम दे रहे हैं। शुक्रवार को उमंग सिंघार अपने गुट के विधायकों के साथ आयकर विभाग में शिकायत करने पहुंचे।

भूपेंद्र के इशारे पर उमंग की राजनीति

कांग्रेस की राजनीति में उमंग सिंघार अपनी चर्चित कार्यशैली के कारण हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने अपने ही वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाकर राजनीति में सुर्खियां बटोरी। राजनीति में हाशिए पर होने के साथ, उच्चतम न्यायालय में तीन हत्याओं के मामलों में संदिग्ध आरोपी भूपेंद्र सिंह के हितों की रक्षा करने के लिए साठगांठ में शामिल हो गए हैं। यानी करेला और नीम चढ़ा, अर्थात दोनों उच्चतम न्यायालय में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। राजनीतिक रूप से अपने हितों की रक्षा के लिए वह सुर्खियों में रहकर बीजेपी संगठन और सरकार के खिलाफ सक्रिय हैं। इतना ही नहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया को भी डराने के लिए नोटिस भेजकर लोकतंत्र के चौथे खंभे की आवाज दबाने का असफल प्रयास किया। लेकिन वो कहते है ना कि साजिशें अंततः खुद को ही बर्बाद कर देती हैं। उमंग सिंघार अपने राजनीतिक करियर की कब्र खुद खो रहे हैं. स्वदेश न्यूज।

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