Pramod Shrivastav Editorial Head
TET : राजधानी भोपाल में आज शिक्षक संगठनों का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। शिक्षक पात्रता परीक्षा याने TET को अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध में प्रदेशभर से हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरे और DPI के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार के निर्देश के बाद TET पास करना अनिवार्य किया गया है, इससे बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों में असंतोष है।प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों पर यह नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है।लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर TET को अनिवार्य करना उनके अनुभव और योगदान का अनदेखा करना है।

TET की अनिवार्यता, शिक्षकों ने खोला मोर्चा, पात्रता परीक्षा का विरोध, शिक्षकों का हल्लाबोल
TET : उन्होंने मांग की कि पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस नियम से छूट दी जाए। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश के बाद, 2011 से पहले नियुक्त करीब डेढ़ लाख शिक्षकों पर भी TET परीक्षा पास करने का दबाव है।ऐसा न करने पर उनकी नौकरी और प्रमोशन पर खतरा मंडरा रहा है।विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों का कहना है कि 20-30 साल की सेवा के बाद अब परीक्षा देना उनके साथ अन्याय है। वे इस आदेश को निरस्त करने और सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग कर रहे हैं।
TET : 1.5 लाख शिक्षकों पर तलवार, निकाला पैदल मार्च
शिक्षकों का कहना है कि TET को पुराने शिक्षकों पर लागू न किया जाए, राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करे साथ ही सेवा शर्तों और पेंशन संबंधी मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनाए। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।।।
TET के विरोध में प्रदर्शन के मुख्य बिंदु
• TET को पुराने शिक्षकों पर लागू न किया जाए
• राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करे
• सेवा शर्तों और पेंशन संबंधी मुद्दों पर स्पष्ट नीति बने
• 20-30 साल की सेवा के बाद अब परीक्षा देना उनके साथ अन्याय
• 2011 से पहले नियुक्त करीब डेढ़ लाख शिक्षकों पर TET पास करने का दबाव
• प्रदेशभर से हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरे, DPI के बाहर किया प्रदर्शन
• TET को अनिवार्य करना शिक्षकों के अनुभव और योगदान का अनदेखा करना
• मांगों पर जल्द विचार नहीं करने पर आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी





