Sugar Price Hike India : सरकार का बयान, एथेनॉल बनाने से नहीं बढ़े दाम,9 साल पहले विदेश से आयात की थी चीनी, अब शुगर उत्पादन भी घटा
Sugar Price Hike India : बढ़ती महंगाई और चीनी के दाम बढ़ने से आम लोग बेहद परेशान हैं। इसका मुख्य कारण खराब मौसम से गन्ने की कम फसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की ऊंची कीमतें, और पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए गन्ने के जूस का इस्तेमाल होना मान जा रहा है…लेकिन अचानक से बढे दाम से लोग परेशां हो रहे है त्योहारी सीजन के चलते लोगो को चीनी की मिठास कम नजर आ रही है | दरसल चीनी के साथ नया खाद्य वस्तुओं के दाम भी बढे जिसके चलते आम जनता पर ये दुगनी मार है,, सरकार का मानना है कि वह अपनी तरफ से प्रयास कर रहे है लेकिन विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा सरकार को घेरने के लिए मिला है ऐसे में महंगाई को कम करने के लिए सरकार के प्रयास क्या होंगे और क्या आम जनता को आने वाले समय में इससे राहत मिलेगी ये बड़ा सवाल है ..इसी पर विस्तार से करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |
Sugar Price Hike India : देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40% यानी ₹19 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है। ताकि लोगो को इससे राहत मिल सके | फिलहाल चीनी के दाम बढ़ने के जो कारण सामने आए है उनमे….
Sugar Price Hike India : इधर बढ़ते चीनी के दाम को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा| कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और स्टॉक पर सरकार से 3 सवाल किए। उन्होंने पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया था खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव है।
Sugar Price Hike India : भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड 1.1 करोड़ टन चीनी एक्सपोर्ट की थी, लेकिन इसके बाद निर्यात लगातार घट रहा है। घरेलू सप्लाई पर संकट हो, तो सरकार ब्राजील जैसे देशों से कच्ची चीनी मंगवाती है और उसे घरेलू मिलों में रिफाइन करके बाजार में उतारती है। 9 साल पहले आखिरी बार 2017 में 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब एक दशक बाद फिर विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है। ऐसे में….बहरहाल ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसमें 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। इसमें करीब 34 लाख टन गन्ना शामिल था। संगठन के मुताबिक, खराब अनाज की उपलब्धता घटने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड भी 8-10% तक महंगे हुए। ऐसे में सरकार ने जो आंकड़े सामने रखे है क्या वाकई उससे चीनी के बढ़ते दाम से आम लोगो को राहत मिलेगी ये बड़ा सवाल है ?
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