मध्यप्रदेश सरकार ने सोयाबीन किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में प्रदेश में सोयाबीन फसल पर भावांतर योजना लागू की जाएगी ताकि किसानों को किसी भी हाल में घाटा न हो।
किसानों को मिलेगा उचित मूल्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5328 प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। राज्य सरकार किसान संगठनों के सुझावों पर आगे बढ़ते हुए इस वर्ष सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना का लाभ देगी।
उन्होंने कहा—“हमारी सरकार किसानों को सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और नुकसान की भरपाई सीधे किसानों तक पहुँचाई जाएगी।”
कैसे मिलेगा भावांतर योजना का लाभ
- किसान पहले की तरह मंडियों में ही सोयाबीन बेचेंगे।
- यदि विक्रय मूल्य MSP से कम होगा, तो अंतर की राशि सरकार सीधे किसानों के खाते में जमा करेगी।
- योजना का लाभ लेने के लिए किसानों का पंजीयन अनिवार्य होगा। सरकार शीघ्र ही पंजीयन प्रक्रिया शुरू करेगी।
क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विस्तार से समझाया कि किसानों के नुकसान की भरपाई दो तरह से की जाएगी:
- यदि मंडी मूल्य MSP से कम लेकिन औसत मॉडल भाव से अधिक हो → किसान को MSP और विक्रय मूल्य के अंतर की राशि मिलेगी।
- यदि मंडी मूल्य औसत मॉडल भाव से भी कम हो → किसान को MSP और औसत मॉडल भाव के अंतर की राशि दी जाएगी।
संकट में किसानों के साथ सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी है।
- पहले भी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत राशि दी गई है।
- हाल ही में बाढ़ प्रभावित किसानों को सहायता प्रदान की गई।
- पीला मोज़ेक रोग से हुए नुकसान के सर्वे भी जारी हैं और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
उन्होंने दोहराया कि किसानों के हित में राज्य सरकार किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ेगी।





