Mohit Jain
मध्यप्रदेश के ग्वालियर सहित सात शहरों में रात का तापमान लगातार गिर रहा है। ग्वालियर-चंबल संभाग में ठंड का असर सबसे ज्यादा है। रतलाम, नरसिंहपुर, सिवनी, बैतूल और नर्मदापुरम में तापमान 15 से 19 डिग्री के बीच बना हुआ है। दिन के मौसम में भी अलग-अलग स्थितियां देखने को मिल रही हैं कहीं धूप असर दिखा रही है तो कहीं दिन भी ठंडे बने हुए हैं।

हवा की दिशा और बादलों ने बढ़ाया उतार-चढ़ाव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश में ठंड में यह उतार-चढ़ाव हवा की दिशा बदलने और बादल छाने की वजह से हो रहा है। अगले दो दिन तक यही स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद प्रदेश में एक बार फिर तेज सर्दी का दौर शुरू होने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने बताया कि दक्षिण भारत में सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र की वजह से मध्यप्रदेश में बादल बढ़ रहे हैं, जिससे दिन में ठंडक और रात में तापमान ऊपर-नीचे हो रहा है।
तेज ठंड क्यों नहीं पड़ रही
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के बावजूद मध्यप्रदेश में ठंड उतनी नहीं बढ़ रही है क्योंकि उत्तरी हवाएं यहां तक नहीं पहुंच पा रही हैं। वहीं, बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर क्षेत्र बादलों को बढ़ा रहा है, जिससे दिन की ठंडक तो बढ़ी है, लेकिन रात का तापमान 5 से 6 डिग्री तक चढ़ गया है।
कई शहरों का तापमान दस डिग्री से नीचे
मंगलवार-बुधवार की रात भोपाल में तापमान 15.4 डिग्री, इंदौर 15.1, ग्वालियर 9.3, उज्जैन 16.5 और जबलपुर 15.2 डिग्री रहा। नौगांव सबसे ठंडा शहर रहा जहां पारा 7.8 डिग्री दर्ज हुआ। मुरैना में 8.8, रीवा 8.9, दतिया-चित्रकूट 9.6, खजुराहो 9.8 और सीधी में 10 डिग्री तापमान रहा।
नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी सर्दी
इस साल नवंबर में मध्यप्रदेश में ठंड ने कई दशक पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। भोपाल में 84 साल की सबसे कड़ी ठंड दर्ज की गई, जबकि इंदौर में 25 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा। पूरे प्रदेश में 15 दिनों तक शीतलहर चली, हालांकि नवंबर के आखिरी सप्ताह में थोड़ी राहत मिली है।
पहाड़ों में जल्दी बर्फबारी, इसलिए नवंबर में ही कड़ाके की ठंड
आमतौर पर नवंबर के दूसरे हिस्से में ठंड बढ़ती है, लेकिन इस बार हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में जल्दी बर्फबारी होने से बर्फीली हवाएं एमपी तक पहुंच गईं। भोपाल में लगातार 15 दिन शीतलहर रही-1931 के बाद यह सबसे लंबा दौर है। वहीं, रात का तापमान 5.2 डिग्री तक गया, जो अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड रहा।





