सौरभ शर्मा के काले धन का राज: कहां लगाए गए करोड़ों रुपये

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मध्य प्रदेश: पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के काले धन का पता लगाने की कवायद, कंपनियों में लाखों का लेनदेन भोपाल: मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल की लोकायुक्त पुलिस द्वारा जारी पूछताछ में नए तथ्य सामने आए हैं। सौरभ शर्मा ने अपनी काली कमाई को रियल एस्टेट और विभिन्न कंपनियों में निवेश किया है। लोकायुक्त को सौरभ से जुड़ी कंपनियों में लाखों रुपये के दैनिक लेनदेन के सबूत मिले हैं। अब उनके सहयोगियों से भी पूछताछ की जाएगी। क्या है मामला? लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। जांच में पता चला है कि सौरभ ने अपनी काली कमाई को रियल एस्टेट और विभिन्न कंपनियों में लगाया है। उनकी कंपनियों से लाखों रुपये के दैनिक लेनदेन के सबूत मिले हैं। सौरभ ने अपनी मां, पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर भी संपत्ति खरीदी है। कंपनियों में निवेश सौरभ शर्मा ने 2021 में अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई, जिसमें शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर डायरेक्टर हैं। इस कंपनी के माध्यम से भोपाल और इंदौर में करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदी गई। इसके अलावा, चेतन के नाम पर अविरल पेट्रोल पंप भी संचालित है, जहां से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होता है। मछली पालन का ठेका सौरभ ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर में चेतन सिंह गौर के नाम पर राजघाट में मछली पालन का ठेका लिया है। यहां से प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख रुपये का लेनदेन होने की जानकारी मिली है। एजेंसी को शक है कि इसका इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए किया जा रहा था। सहयोगियों से पूछताछ लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के सहयोगियों चेतन और शरद से भी पूछताछ की है। चेतन ने दावा किया है कि वह सौरभ के लिए सिर्फ एक कर्मचारी के तौर पर काम करता था, जबकि शरद ने कहा है कि उसका अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी के अलावा किसी अन्य व्यवसाय से कोई संबंध नहीं है। संपत्ति की जांच सौरभ के पास से बड़ी संख्या में संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं। यह संपत्ति उनकी मां, पत्नी, साले, साली और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई है। लोकायुक्त पुलिस अब इन सभी से पूछताछ करेगी। साथ ही, सौरभ के आरक्षक पद पर रहने के दौरान उनके सहयोगी रहे लोगों से भी जवाब मांगा जाएगा। कब क्या हुआ? 19 दिसंबर: लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के भोपाल स्थित घर और ऑफिस पर छापा मारकर 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 234 किलो चांदी बरामद की। 19 दिसंबर की रात: भोपाल के मेंडोरी में चेतन के नाम पर रजिस्टर्ड कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। 27 दिसंबर: ईडी ने सौरभ और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मारकर 6 करोड़ की एफडी और 23 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए। 17 जनवरी: ईडी ने सौरभ के रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापा मारकर 12 लाख नकद और 9.9 किलो चांदी बरामद की। 28 जनवरी: सौरभ, चेतन और शरद को गिरफ्तार कर लोकायुक्त पुलिस ने सात दिन की रिमांड पर भेजा। आगे की कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस चार फरवरी को तीनों को कोर्ट के सामने पेश करेगी। इस दौरान उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग की जा सकती है। जांच में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।

मध्य प्रदेश: पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के काले धन का पता लगाने की कवायद, कंपनियों में लाखों का लेनदेन

भोपाल: मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल की लोकायुक्त पुलिस द्वारा जारी पूछताछ में नए तथ्य सामने आए हैं। सौरभ शर्मा ने अपनी काली कमाई को रियल एस्टेट और विभिन्न कंपनियों में निवेश किया है। लोकायुक्त को सौरभ से जुड़ी कंपनियों में लाखों रुपये के दैनिक लेनदेन के सबूत मिले हैं। अब उनके सहयोगियों से भी पूछताछ की जाएगी।

क्या है मामला?
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। जांच में पता चला है कि सौरभ ने अपनी काली कमाई को रियल एस्टेट और विभिन्न कंपनियों में लगाया है। उनकी कंपनियों से लाखों रुपये के दैनिक लेनदेन के सबूत मिले हैं। सौरभ ने अपनी मां, पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर भी संपत्ति खरीदी है।

कंपनियों में निवेश
सौरभ शर्मा ने 2021 में अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई, जिसमें शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर डायरेक्टर हैं। इस कंपनी के माध्यम से भोपाल और इंदौर में करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदी गई। इसके अलावा, चेतन के नाम पर अविरल पेट्रोल पंप भी संचालित है, जहां से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होता है।

मछली पालन का ठेका
सौरभ ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर में चेतन सिंह गौर के नाम पर राजघाट में मछली पालन का ठेका लिया है। यहां से प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख रुपये का लेनदेन होने की जानकारी मिली है। एजेंसी को शक है कि इसका इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए किया जा रहा था।

मध्य प्रदेश: पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के काले धन का पता लगाने की कवायद, कंपनियों में लाखों का लेनदेनभोपाल: मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल की लोकायुक्त पुलिस द्वारा जारी पूछताछ में नए तथ्य सामने आए हैं। सौरभ शर्मा ने अपनी काली कमाई को रियल एस्टेट और विभिन्न कंपनियों में निवेश किया है। लोकायुक्त को सौरभ से जुड़ी कंपनियों में लाखों रुपये के दैनिक लेनदेन के सबूत मिले हैं। अब उनके सहयोगियों से भी पूछताछ की जाएगी।क्या है मामला?
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। जांच में पता चला है कि सौरभ ने अपनी काली कमाई को रियल एस्टेट और विभिन्न कंपनियों में लगाया है। उनकी कंपनियों से लाखों रुपये के दैनिक लेनदेन के सबूत मिले हैं। सौरभ ने अपनी मां, पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर भी संपत्ति खरीदी है।कंपनियों में निवेश
सौरभ शर्मा ने 2021 में अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई, जिसमें शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर डायरेक्टर हैं। इस कंपनी के माध्यम से भोपाल और इंदौर में करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदी गई। इसके अलावा, चेतन के नाम पर अविरल पेट्रोल पंप भी संचालित है, जहां से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होता है।मछली पालन का ठेका
सौरभ ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर में चेतन सिंह गौर के नाम पर राजघाट में मछली पालन का ठेका लिया है। यहां से प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख रुपये का लेनदेन होने की जानकारी मिली है। एजेंसी को शक है कि इसका इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए किया जा रहा था।सहयोगियों से पूछताछ
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के सहयोगियों चेतन और शरद से भी पूछताछ की है। चेतन ने दावा किया है कि वह सौरभ के लिए सिर्फ एक कर्मचारी के तौर पर काम करता था, जबकि शरद ने कहा है कि उसका अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी के अलावा किसी अन्य व्यवसाय से कोई संबंध नहीं है।संपत्ति की जांच
सौरभ के पास से बड़ी संख्या में संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं। यह संपत्ति उनकी मां, पत्नी, साले, साली और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई है। लोकायुक्त पुलिस अब इन सभी से पूछताछ करेगी। साथ ही, सौरभ के आरक्षक पद पर रहने के दौरान उनके सहयोगी रहे लोगों से भी जवाब मांगा जाएगा।कब क्या हुआ?19 दिसंबर: लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के भोपाल स्थित घर और ऑफिस पर छापा मारकर 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 234 किलो चांदी बरामद की।19 दिसंबर की रात: भोपाल के मेंडोरी में चेतन के नाम पर रजिस्टर्ड कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।27 दिसंबर: ईडी ने सौरभ और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मारकर 6 करोड़ की एफडी और 23 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए।17 जनवरी: ईडी ने सौरभ के रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापा मारकर 12 लाख नकद और 9.9 किलो चांदी बरामद की।28 जनवरी: सौरभ, चेतन और शरद को गिरफ्तार कर लोकायुक्त पुलिस ने सात दिन की रिमांड पर भेजा।आगे की कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस चार फरवरी को तीनों को कोर्ट के सामने पेश करेगी। इस दौरान उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग की जा सकती है। जांच में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।

सहयोगियों से पूछताछ
लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के सहयोगियों चेतन और शरद से भी पूछताछ की है। चेतन ने दावा किया है कि वह सौरभ के लिए सिर्फ एक कर्मचारी के तौर पर काम करता था, जबकि शरद ने कहा है कि उसका अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी के अलावा किसी अन्य व्यवसाय से कोई संबंध नहीं है।

संपत्ति की जांच
सौरभ के पास से बड़ी संख्या में संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं। यह संपत्ति उनकी मां, पत्नी, साले, साली और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई है। लोकायुक्त पुलिस अब इन सभी से पूछताछ करेगी। साथ ही, सौरभ के आरक्षक पद पर रहने के दौरान उनके सहयोगी रहे लोगों से भी जवाब मांगा जाएगा।

कब क्या हुआ?

  • 19 दिसंबर: लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ के भोपाल स्थित घर और ऑफिस पर छापा मारकर 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 234 किलो चांदी बरामद की।
  • 19 दिसंबर की रात: भोपाल के मेंडोरी में चेतन के नाम पर रजिस्टर्ड कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
  • 27 दिसंबर: ईडी ने सौरभ और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मारकर 6 करोड़ की एफडी और 23 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए।
  • 17 जनवरी: ईडी ने सौरभ के रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापा मारकर 12 लाख नकद और 9.9 किलो चांदी बरामद की।
  • 28 जनवरी: सौरभ, चेतन और शरद को गिरफ्तार कर लोकायुक्त पुलिस ने सात दिन की रिमांड पर भेजा।

आगे की कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस चार फरवरी को तीनों को कोर्ट के सामने पेश करेगी। इस दौरान उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग की जा सकती है। जांच में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।

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