Report: Avinash Shrivastava
Sasaram रोहतास जिले के सासाराम स्थित तकिया के पटेल धर्मशाला में रविवार को जदयू जिलाध्यक्ष के चुनाव के दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष गहरा गया और देखते ही देखते विवाद हाथापाई तक पहुँच गया। हंगामे की सूचना मिलते ही सदर एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचीं और उग्र कार्यकर्ताओं को समझा-बुझाकर शांत कराया। इस घटना ने जिला इकाई के भीतर चल रही गहरी गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है।

नामांकन में धांधली का आरोप: कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
Sasaram चुनावी प्रक्रिया में शामिल कई कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और मनमाने ढंग से चुनाव संपन्न कराने की कोशिश की गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश करना चाहते थे, उन्हें जानबूझकर नामांकन पत्र (नॉमिनेशन फॉर्म) उपलब्ध नहीं कराया गया। आरोप यह भी है कि कुछ खास गुट अपने पसंदीदा व्यक्ति को असंवैधानिक तरीके से पद पर बैठाने की फिराक में थे।
Sasaram दो खेमों में बंटी पार्टी: जीत के दावे और पक्षपात के आरोप
Sasaram हंगामे के बीच एक गुट ने बिंदा चंद्रवंशी को निर्विरोध जिलाध्यक्ष घोषित कर नारेबाजी शुरू कर दी। बिंदा चंद्रवंशी का दावा है कि निर्वाचित पदाधिकारी संजीव पटेल की देखरेख में सभी नियमों का पालन करते हुए उन्हें विजयी घोषित कर प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया है। वहीं, दूसरे खेमे ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया। दूसरे पक्ष का कहना है कि निर्वाचन अधिकारी ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया, जिसके कारण पार्टी स्पष्ट रूप से दो धड़ों में विभाजित नजर आ रही है।

प्रशासनिक हस्तक्षेप: एसडीएम ने संभाला मोर्चा
Sasaram स्थिति बिगड़ती देख सदर एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने मौके पर पहुँचकर दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सहमति न बन पाने के कारण विवाद बढ़ा है। उन्होंने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए हंगामे को शांत कराया और सुझाव दिया कि इस विवाद का समाधान पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रदेश नेतृत्व के हस्तक्षेप से ही संभव है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जदयू का प्रदेश नेतृत्व इस विवादित चुनाव पर क्या अंतिम फैसला लेता है।
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