Mohit Jain
आज पूरा देश लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है। 31 अक्टूबर को हर वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है, ताकि भारत की अखंडता, एकता और मजबूती के प्रतीक इस महानायक के योगदान को याद किया जा सके।
सरदार पटेल न केवल भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे, बल्कि वे उस व्यक्ति थे जिन्होंने आज़ाद भारत के राजनीतिक नक्शे को एक किया वो भारत जिसे हम आज एक संपूर्ण राष्ट्र के रूप में जानते हैं।
किसान पुत्र से लेकर लौह पुरुष तक का सफर
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद जिले के करमसद गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे आत्मनिर्भर, साहसी और दृढ़ निश्चयी थे। कहा जाता है कि बचपन में जब उनके शरीर पर फोड़ा हुआ, तो उन्होंने बिना किसी भय के गर्म लोहे से उसे स्वयं फोड़ दिया। यह प्रसंग उनके अदम्य साहस, आत्मसंयम और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक माना जाता है। बाद में यही गुण उन्हें भारत के राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व में अलग पहचान दिलाने वाले साबित हुए।
बारडोली सत्याग्रह से मिला ‘सरदार’ का खिताब

1928 में अंग्रेजों ने गुजरात के बारडोली क्षेत्र में टैक्स बढ़ा दिया। किसानों पर अत्याचार बढ़ा, तब वल्लभभाई पटेल उनके साथ खड़े हुए। उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व किया, जनता को संगठित किया और अहिंसा के मार्ग पर ब्रिटिश सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। इस आंदोलन की सफलता के बाद, महिलाओं ने स्नेह और सम्मान से उन्हें ‘सरदार’ कहना शुरू किया और तब से वे पूरे देश में ‘सरदार पटेल’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए। बारडोली सत्याग्रह ने दिखाया कि संगठित जनता और दृढ़ नेतृत्व मिलकर बड़े से बड़ा अन्याय समाप्त कर सकता है।
रियासतों का एकीकरण सरदार पटेल की ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत की स्वतंत्रता के बाद देश 562 रियासतों में बंटा हुआ था। हर राजा अपने राज्य को स्वतंत्र रखना चाहता था। ऐसे में देश का एकीकरण असंभव सा लग रहा था। लेकिन सरदार पटेल ने अपनी दूरदर्शिता, रणनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह चमत्कार कर दिखाया। उन्होंने संवाद, समझौता और आवश्यकता पड़ने पर सख़्ती का संतुलित प्रयोग किया।
हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी कठिन रियासतों के मामलों में पटेल की कूटनीति और प्रशासनिक क्षमता ने देश को बिखरने से बचाया। उनकी वजह से भारत एक अखंड राष्ट्र बन सका। उनके इस कार्य के लिए उन्हें “भारत का शिल्पकार” और “आधुनिक भारत के निर्माता” कहा गया।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक
सरदार पटेल के विचार आज भी देश की एकता और अखंडता की नींव हैं। उन्होंने हमेशा कहा था :
“देश की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है, और इसी ताकत को कोई नहीं तोड़ सकता।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज केवड़िया (गुजरात) में स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’, जो सरदार पटेल की स्मृति में बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, इस बात का प्रतीक है कि उनके विचार आज भी जीवंत हैं। इस वर्ष उनकी 150वीं जयंती पर यहां भव्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ‘एकता की शपथ’ के आयोजन किए जा रहे हैं।
सरदार पटेल से सीखें कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम
सरदार पटेल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र को सर्वोपरि रखता है।
उनके जीवन से हमें कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी, निष्ठा और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा मिलती है।

आज जब भारत विश्व पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा है, तब यह याद रखना आवश्यक है कि इस सशक्त भारत की नींव उसी लौह पुरुष ने रखी थी, जिसने बिखरे हुए भारत को एक सूत्र में बांध दिया था।
सरदार पटेल न होते, तो भारत की कल्पना भी अधूरी होती।
आज उनकी जयंती पर समूचा राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है और एकता, अखंडता और सशक्त भारत के उनके सपने को साकार करने का संकल्प दोहराता है।





