Hotmail के संस्थापक Sabeer Bhatia ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर जमकर निशाना साधा। उनका कहना है कि भारत की बाबू संस्कृति और जोखिम से डरने वाली मानसिकता ने देश में इनोवेशन को कुचल दिया है। Bhatia ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि उनका एक प्रोजेक्ट, जो WhatsApp से भी बड़ा हो सकता था, TRAI के कारण बंद हो गया।
“हम किसी नियम को तोड़ नहीं रहे थे, लेकिन किसी बाबू ने अपने तरीके से समझा और सब खत्म। अगर यह अमेरिका में होता, तो यह आइडिया दुनिया बदल देता!”
“भारत में नियम तोड़ने की हिम्मत नहीं, इसलिए Uber जैसा स्टार्टअप यहाँ नहीं आ सकता”
Bhatia के मुताबिक, भारत का सिस्टम मौलिकता को नहीं, बल्कि नियमों का पालन करने वालों को पुरस्कृत करता है। उन्होंने Uber का उदाहरण देते हुए कहा:
“Uber ने दुनिया भर के टैक्सी नियम तोड़ दिए। क्या वह कंपनी भारत से आ सकती थी? बिल्कुल नहीं! यहाँ तो लोग नए आइडिया को शुरू होने से पहले ही बंद कर देते हैं।”
“भारतीय एजुकेशन सिस्टम ‘रद्दी’ है – IITians भी सिर्फ नौकरी के पीछे भागते हैं”
Bhatia ने भारत की शिक्षा प्रणाली पर भी निशाना साधा:
“हर साल 65,000 बच्चे JEE क्रैक करने के लिए कोटा जाते हैं। क्या वे एंटरप्रेन्योर बन रहे हैं? नहीं, वे अपने दिमाग के सेल्स मार रहे हैं! IIT के टॉपर्स भी JP Morgan में नौकरी पाने के लिए दौड़ते हैं। कहाँ है क्रिटिकल थिंकिंग?”
उनका मानना है कि भारत में बिजनेस प्लान बनाना ही इनोवेशन की मौत है।
“सिलिकॉन वैली में अगर किसी के पास आइडिया है, तो सब मिलकर उसे बनाते हैं। यहाँ 20 लोग आपको बता देंगे कि ‘यह नहीं हो सकता’। हम पैसे के पीछे भागते हैं, समस्या सुलझाने के पीछे नहीं।”
निष्कर्ष: क्या भारत वाकई में ‘स्टार्टअप नेशन’ बन पाएगा?
Bhatia की बातें एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं – क्या भारत की नौकरशाही और रिस्क-एवर्स कल्चर देश को सच्चे इनोवेशन से रोक रही है? जब तक सिस्टम में बदलाव नहीं होगा, तब तक भारत से कोई WhatsApp, Uber या Google नहीं निकल पाएगा।
आपकी राय? क्या आपको लगता है कि भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार और समाज को अपनी सोच बदलनी चाहिए? कमेंट में बताएं!





