by: vijay yadav
Riyadh Airport Attack नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए घातक हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भारत, पाकिस्तान और अमेरिका समेत कई देशों ने हमले की निंदा करते हुए नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई है। इस घटना ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
Riyadh Airport Attack रियाद एयरपोर्ट हमले में 12 लोगों की मौत
सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन अधिकारियों के अनुसार, 10 अक्टूबर को हुए हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए। मृतकों में सऊदी अरब के नागरिकों के साथ कई अन्य देशों के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।

हमले के बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और हवाई सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुईं। सऊदी अधिकारियों ने इस हमले के लिए यमन के हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, घटनाक्रम से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल बना हुआ है।
Riyadh Airport Attack भारत ने हमले को बताया अस्वीकार्य
भारत के विदेश मंत्रालय ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बार-बार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने 10 अक्टूबर के हमले में लोगों की जान जाने, कई लोगों के घायल होने और संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर दुख जताया।
भारत ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले ऐसे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। भारत ने सऊदी अरब और उसके लोगों के साथ एकजुटता भी जताई।
Riyadh Airport Attack पाकिस्तान ने भी की कड़ी निंदा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन तथा क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराया। इस प्रतिक्रिया के साथ ही सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के संबंधों और आपसी रक्षा प्रतिबद्धताओं पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।
Riyadh Airport Attack ट्रंप के बयान से बढ़ी सैन्य कार्रवाई की अटकलें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले को गंभीर और अस्वीकार्य बताते हुए सऊदी नेतृत्व से बातचीत करने की बात कही है। उनसे जब पूछा गया कि क्या अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियान में शामिल हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि इस विकल्प पर विचार किया जा रहा है और जल्द फैसला लिया जा सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हमले की निंदा की और मृतकों में एक अमेरिकी नागरिक के शामिल होने की जानकारी दी। उन्होंने सऊदी अरब के प्रति समर्थन जताते हुए हमलों को रोकने की मांग की।
ट्रंप प्रशासन का अगला कदम क्या होगा, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है। यदि अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो यमन संघर्ष और व्यापक पश्चिम एशिया संकट में तनाव और बढ़ सकता है।
Riyadh Airport Attack संयुक्त राष्ट्र ने जताई गंभीर चिंता
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने सऊदी अरब के नागरिक एयरपोर्ट पर हुए घातक हमलों को क्षेत्रीय तनाव में गंभीर बढ़ोतरी बताया। उनके मुताबिक, नागरिक ठिकानों पर ऐसे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और यमन में शांति स्थापित करने के प्रयासों को और कठिन बना सकते हैं।
मिस्र, कतर, जापान और फलस्तीन समेत कई पक्षों ने भी हमलों की निंदा की है। इन प्रतिक्रियाओं में सऊदी अरब की संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया।
Riyadh Airport Attack पश्चिम एशिया में आगे क्या होगा?
रियाद एयरपोर्ट पर हमले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश क्या कदम उठाते हैं। अमेरिकी सैन्य भागीदारी को लेकर ट्रंप का रुख भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की चिंता है कि जवाबी कार्रवाई और लगातार हमलों से यमन संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है। ऐसे में कूटनीतिक प्रयास, नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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