BY: Yoganand Shrivastva
✦ पाकिस्तान की छवि को फिर लगा बड़ा झटका
एक बार फिर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र दुनिया के सामने उजागर हुआ है। जिस व्यक्ति को वहां की सेना ने एक “मासूम मौलाना” और “फैमिली मैन” बताया, वह कोई और नहीं बल्कि लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज अब्दुर रऊफ निकला।
इस खुलासे ने न सिर्फ पाकिस्तान की आतंकियों के साथ गहरी मिलीभगत को उजागर किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अब भी आतंकवाद का समर्थन कर रहा है।
✦ कौन है हाफिज अब्दुर रऊफ?
- हाफिज अब्दुर रऊफ लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेतृत्व में शामिल रहा है।
- वर्ष 2010 में अमेरिका ने उसे आधिकारिक तौर पर वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
- हाल ही में भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसके मारे जाने की खबर सामने आई।
✦ पाकिस्तान ने कैसे दिया झूठा बयान?
- पाकिस्तान की सेना ने एक प्रेस ब्रीफिंग में दावा किया कि वायरल तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति “मासूम मौलाना” है जो एक शांतिप्रिय फैमिली मैन था।
- लेकिन जब जांच हुई तो सामने आया कि वो व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि लश्कर आतंकी हाफिज अब्दुर रऊफ ही था।

✦ आतंकी के जनाजे में कौन-कौन शामिल था?
भारत ने उन पाकिस्तानी अधिकारियों के नाम और तस्वीरें जारी की हैं जो हाफिज अब्दुर रऊफ के जनाजे में मौजूद थे:
- लेफ्टिनेंट जनरल फैय्याज हुसैन शाह – IV कॉर्प्स कमांडर, लाहौर
- मेजर जनरल राव इमरान सरताज – 11वीं इन्फैंट्री डिवीजन, लाहौर
- ब्रिगेडियर मोहम्मद फुरकान शब्बीर – 15 हाइब्रिड मैकेनाइज्ड ब्रिगेड
- डॉ उस्मान अनवर – पंजाब पुलिस महानिरीक्षक
- मलिक सोहैब अहमद भेर्थ – पंजाब प्रांतीय विधानसभा सदस्य
इन सबकी मौजूदगी से साफ है कि पाकिस्तानी सेना और प्रशासनिक तंत्र आतंकवादियों से न सिर्फ सहानुभूति रखता है, बल्कि सक्रिय समर्थन भी देता है।
✦ आतंकियों को राजकीय सम्मान!
- मुरिदके में आतंकियों के जनाजे को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया।
- इसमें सेना और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि पाकिस्तान में आतंकियों को राजकीय सम्मान दिया जाता है।
✦ भारत का ऑपरेशन सिंदूर: आतंक पर करारा वार
भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में छुपे आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दिया। इस ऑपरेशन में कई लश्कर आतंकियों का खात्मा हुआ, जिनमें हाफिज अब्दुर रऊफ भी शामिल था।
🔍 क्या है इससे मिलने वाले संकेत?
- पाकिस्तान की सरकार और सेना, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भले शांति की बातें करें, लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल उलट है।
- इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान आज भी आतंकवाद की शरणस्थली बना हुआ है।





