Isa Ahmad
REPORT- SYED ALI
इमाम बारगाह इमाम अली रज़ा में छठवीं मजलिस, श्रद्धा और ग़म का अनोखा संगम
कौशांबी के करारी कस्बे के नया गंज स्थित इमाम बारगाह इमाम अली रज़ा रज़ाबाद में बुधवार की रात अय्यामे फ़ातिमिया की छठवीं मजलिस का आयोजन अदब, अकीदत और गहरे ग़म के माहौल में किया गया। मजलिस के दौरान नबी-ए-करीम हज़रत मोहम्मद ﷺ की लाड़ली और एकलौती बेटी बीबी फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के फ़ज़ायल और मसाएब का बयान किया गया। उनकी पाक ज़िंदगी और उन पर हुए अत्याचारों का ज़िक्र सुनकर मौजूद अज़ादारों की आंखें नम हो उठीं। कई लोग फूट-फूटकर रो पड़े और पूरा इमाम बारगाह ग़मगीन सिसकियों से भर गया।
कुरआन की तिलावत से शुरुआत, मसाएब के बयान पर गूंज उठीं सिसकियां
मजलिस का आगाज़ शाम 7 बजे कुरआने मजीद की तिलावत से हुआ, जिसे सैय्यद ज़फर ने पेश किया। इसके बाद जनाब एहसान हैदर करारीवी, तंजीम रज़ा और मोहम्मद रज़ा ने सोज़ख़ानी कर माहौल को और ग़मगीन बना दिया। हैदर कोरालवी ने पेशख़ानी अदा की।
मजलिस को मौलाना नय्यर जलालपुरी ने खिताब किया। उन्होंने बीबी फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) की अद्वितीय शख्सियत पर विस्तार से रोशनी डालते हुए बताया कि रसूले खुदा ﷺ उन्हें इतना प्यार करते थे कि “उम्मे अबीहा” – “अपने बाप की मां” कहकर पुकारते थे।
मौलाना ने अपने बयान में बताया कि रसूल ﷺ की वफ़ात के बाद बीबी फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) ने कठोर मसाएब देखे, फ़ेदक पर ग़सीबाना कब्ज़े और उनके साथ हुए ज़ुल्म ने उन्हें बेहद दुख पहुंचाया। जब उनका हक़ मांगा गया तो उन्हें दरबार में झुठलाया गया। इन मसाएब का ज़िक्र करते ही मजलिस में मौजूद हर दिल भर आया और अज़ादारों की सिसकियां गूंजने लगीं। मसनूई शहादत का बयान होते ही माहौल अश्कबार हो गया।
सजदा-ए-ग़म में डूबा माहौल, कमेटी और समाज के लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन नजीब इलाहाबादी ने बेहद बेहतरीन अंदाज़ में किया। मजलिस का इंतज़ाम अल-क़ासिम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किया गया।
मौके पर सोसाइटी के अध्यक्ष सैय्यद हाशिम अली, सचिव आशिक अली, कमेटी के सदस्य एख़्तियार हुसैन, मोहसिन रिज़वी, मौलाना सैय्यद मोमिन अली, सैय्यद अली, मोहम्मद अली, जफ़र सहित बड़ी संख्या में अज़ादार मौजूद रहे।
रात 10 बजे तक चले इस कार्यक्रम में ग़म, इबादत और मोहब्बत का अनोखा संगम देखने को मिला, जिसने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ दी।





