Vijay Nandan डिजिटल एडिटर
padosi-ki-jasoosi : भैया, हमारे मोहल्ले में अगर कोई “इंटेलिजेंस ब्यूरो” की अनौपचारिक ब्रांच है, तो वो है, निगरानी लाल जी का घर। जी हाँ, वही निगरानी लाल जी जिनकी खिड़की कभी बंद नहीं होती और जिनकी नजरें CCTV कैमरे से भी तेज काम करती हैं।
निगरानी लाल का मानना है कि “पड़ोसी का हाल जानना” सामाजिक सेवा है। सुबह जैसे ही मैं दरवाजा खोलता हूँ, सामने से आवाज आती है, “अरे भइया, आज दूधवाला 5 मिनट लेट क्यों आया?” अब भला मुझे क्या पता कि दूधवाले की घड़ी में बैटरी खत्म हो गई थी या उसका मूड ऑफ था!
उनकी जासूसी का लेवल इतना हाई है कि अगर आप रात में 11:59 पर भी छींक दें, तो सुबह 6 बजे रिपोर्ट तैयार मिलती है, “कल रात आपको सर्दी थी ना? मैंने सुना… दो बार छींक आई थी आपको!
padosi-ki-jasoosi : निगरानी लाल जी के कानों में “सराउंड साउंड सिस्टम” फिट है
कभी-कभी लगता है कि निगरानी लाल जी के कानों में “सराउंड साउंड सिस्टम” फिट है। हमारी रसोई में क्या बन रहा है, इसका अपडेट उन्हें हमसे पहले मिल जाता है।
एक दिन मेरी पत्नी ने कहा
“आज खिचड़ी बना लेते हैं।”
और शाम को निगरानी लाल जी टहलते-टहलते बोले
“खिचड़ी बन रही है क्या? थोड़ा घी ज्यादा डालिएगा, स्वाद अच्छा आता है!”
padosi-ki-jasoosi : अब आप ही बताइए, ये जानकारी उन्हें किस सैटेलाइट से मिली?
उनकी खासियत ये भी है कि वे हर आने-जाने वाले पर नजर रखते हैं। अगर आपके घर कोई मेहमान आ जाए, तो समझ लीजिए अगली सुबह मोहल्ले में प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली है।
“कल आपके घर जो नीली शर्ट वाला आया था, कौन था? रिश्तेदार लग रहा था… लेकिन चाल-ढाल कुछ अलग थी!”
ऐसे सवालों का जवाब देते-देते कभी-कभी लगता है कि मैं अपना ही बायोडाटा भूल जाऊँ, लेकिन निगरानी लाल जी को सब याद है।

एक बार मैंने सोचा, क्यों न इन्हें थोड़ा भ्रमित किया जाए। मैंने जानबूझकर फोन पर जोर-जोर से कहा
“हाँ भाई, 50 लाख की डील फाइनल हो गई है !
बस फिर क्या था, अगले दिन निगरानी लाल जी ऐसे मुस्कुरा रहे थे जैसे खुद शेयर मार्केट में निवेश कर आए हों।
बहुत बढ़िया! अब तो पार्टी बनती है!
मैंने कहा “अरे वो तो मजाक था।”
निगरानी लाल जी का चेहरा ऐसा हो गया जैसे इंटरनेट अचानक बंद हो गया हो।
padosi-ki-jasoosi : निगरानी लाल जी की जासूसी का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कभी “अकेलापन” महसूस नहीं होता। आप घर में हों या बाहर, कोई न कोई आपकी एक्टिविटी पर नजर रख रहा होता है।
अगर आप दो दिन तक बाहर न निकलें, तो तीसरे दिन वे खुद हालचाल पूछने आ जाते हैं,
“सब ठीक है ना? दो दिन से दिखे नहीं… मैंने सोचा कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं!”
padosi-ki-jasoosi : असल में, ये उनकी जिज्ञासा नहीं, “डेली अपडेट मिस” होने की बेचैनी होती है।
कभी-कभी सोचता हूँ कि अगर देश की सारी एजेंसियाँ निगरानी लाल जी जैसे लोगों को भर्ती कर लें, तो कोई भी खबर छिपी नहीं रह सकती।
लेकिन फिर लगता है, अगर ऐसा हो गया, तो हमारी प्राइवेसी का क्या होगा?
खैर, हर मोहल्ले में एक निगरानी लाल जी जरूर होते हैं, जो बिना सैलरी के “निगरानी” का जिम्मा उठाए रहते हैं।
और हम भी चुपचाप उनके इस हुनर को झेलते रहते हैं, क्योंकि कहीं न कहीं हमें भी थोड़ा मजा आता है।
आखिरकार, जिंदगी में थोड़ा-बहुत “जासूसी मसाला” भी जरूरी है… वरना कहानी में ट्विस्ट कैसे आएगा!





