BY: Yoganand Shrivastava
नई दिल्ली: देश को हिला देने वाले निठारी सीरियल किलिंग केस से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि को निरस्त करते हुए कहा कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।
1. सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा,
“याचिकाकर्ता सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है। यदि वह किसी अन्य प्रकरण में वांछित नहीं है, तो उसकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय कोली द्वारा दायर सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। इस याचिका में उसने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।
2. क्या है पूरा मामला
निठारी हत्याकांड वर्ष 2005–2006 के दौरान घटित हुआ था। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब नोएडा के निठारी गांव में एक मकान के पास नाले से कई बच्चों के कंकाल बरामद हुए। जांच में पता चला कि वह मकान उद्योगपति मोनिंदर सिंह पंढेर का था और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू नौकर के रूप में काम करता था।
3. पहले हुए फैसले
फरवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने 15 वर्षीय लड़की की हत्या और बलात्कार के एक मामले में कोली की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। हालांकि बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसके खिलाफ दर्ज 13 में से 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था। इसके बाद कोली ने इस वर्ष अंतिम लंबित मामले में सुधारात्मक याचिका दाखिल की थी, जिस पर अब उसे भी राहत मिल गई है।
4. अदालत की पूर्व टिप्पणी
7 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि कोली की सजा केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर दी गई थी, जबकि शेष मामलों में वह पहले ही बरी हो चुका था। अदालत ने इसे एक “असामान्य स्थिति” बताते हुए पुनर्विचार की आवश्यकता मानी थी।
5. निठारी केस का पृष्ठभूमि
दिसंबर 2006 में निठारी गांव के नाले में बच्चों के अवशेष मिलने से यह भयानक मामला सामने आया। जांच के दौरान कई बच्चों के लापता होने, हत्या और यौन शोषण की घटनाएं उजागर हुईं। सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर दोनों को गिरफ्तार किया गया था। वर्षों की सुनवाई के बाद आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कोली को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।





