शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन माता कालरात्रि के पूजन के लिए समर्पित होता है। मां कालरात्रि दुर्गा के सातवें स्वरूप हैं और उनका रूप गहन अंधकार के समान काला होता है। इसी कारण उन्हें कालरात्रि कहा जाता है।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि मां कालरात्रि की साधना से जीवन में सभी बाधाएं, भय और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। उनके पूजन से भक्त निर्भय बनते हैं और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
मां कालरात्रि की पूजा के लिए कुछ विशेष नियम और प्रक्रिया हैं जिन्हें सावधानीपूर्वक पालन करना चाहिए:
- स्नान और स्वच्छता: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और ध्यान करें। साफ कपड़े पहनकर पूजा के लिए तैयार हों।
- पूजा स्थल: घर के ईशान कोण में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां कालरात्रि का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
- पवित्रिकरण: मूर्ति या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल चंदन या रोली का तिलक लगाएं।
- पूजन सामग्री: फूल, फल, धूप, दीप आदि अर्पित करें। विशेष रूप से गुड़हल का फूल और गुड़ का भोग इस दिन जरूरी है।
- मंत्र और पाठ: मां कालरात्रि के मंत्र और श्लोक का पाठ करें।
- आरती: पूजा के अंत में श्रद्धा भाव से आरती करें।
मां कालरात्रि का मंत्र
पूजन में मंत्र का जाप विशेष रूप से शुभ माना जाता है। भक्तों की मान्यता है कि मंत्र का उच्चारण करने से देवी दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
मंत्र:ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालरात्रै नमः।
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
श्लोक:एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।
मां कालरात्रि की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवता और मनुष्य रक्तबीज नामक राक्षस से परेशान थे। उन्होंने महादेव से उसकी रक्षा के लिए मां पार्वती को बुलाया।
मां पार्वती ने कालरात्रि का रूप धारण करके रक्तबीज का वध किया। रक्तबीज की खासियत थी कि उसका हर खून का बूंद गिरने पर नया राक्षस उत्पन्न होता था। मां कालरात्रि ने उसके खून को गिरने से पहले ही अपने मुंह में लिया और राक्षस का नाश किया। इस प्रकार उन्होंने देवताओं और मनुष्यों को भयमुक्त किया।
पूजा का धार्मिक महत्व
मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है, भयमुक्त होता है और सफलता प्राप्त करता है। इसके अलावा, साधना से बुरी शक्तियों से सुरक्षा मिलती है और हर कार्य में मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली काल के मुंह से बचाने वाली
दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा महा चंडी तेरा अवतारा
पृथ्वी और आकाश पर सारा महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली दुष्टों का लहू चखने वाली
कलकत्ता स्थान तुम्हारा सब जगह देखूं तेरा नजारा
सभी देवता सब नर नारी गावे स्तुति सभी तुम्हारी
रक्तदंता और अन्नपूर्णा कृपा करे तो कोई भी दुःख ना
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी ना कोई गम ना संकट भारी
उस पर कभी कष्ट ना आवे महाकाली मां जिसे बचावे
तू भी ‘भक्त’ प्रेम से कह कालरात्रि मां तेरी जय.





