Report: Vaibhav
Narsinghpur की जीवनदायिनी मानी जाने वाली प्राचीन सिंगरी नदी को नया जीवन देने के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का शंखनाद हो गया है। कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने स्वयं नदी की तलहटी में उतरकर श्रमदान किया और इस अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देने की अपील की। इस दौरान भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और प्रशासनिक अमला भी सफाई अभियान का हिस्सा बना।
Narsinghpur विरासत को बचाने की पहल: नदी को केवल जल स्रोत नहीं, धरोहर माना
अभियान का शुभारंभ करते हुए मंत्री पटेल ने नदी के गहरीकरण और सफाई कार्य में सक्रिय रूप से हाथ बंटाया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सिंगरी नदी नरसिंहपुर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। मंत्री ने स्थानीय लोगों से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से श्रमदान कर अपनी इस धरोहर को स्वच्छ और अविरल बनाने में मदद करें।
Narsinghpur बजट की चिंता नहीं: विधायक निधि से भी दी जाएगी अतिरिक्त राशि
नदी पुनर्जीवन की योजना को लेकर मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बड़े वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पुनीत कार्य में धन की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। सरकारी बजट के अलावा, आवश्यकता पड़ने पर वे अपनी विधायक निधि से भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराएंगे। इस राशि का उपयोग नदी के गहरीकरण, अतिक्रमण हटाने और जलधारा को फिर से जीवित करने के लिए किया जाएगा।
Narsinghpur चरणबद्ध योजना: गहरीकरण से लेकर हरित पट्टी विकसित करने तक का लक्ष्य
प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम के दौरान नदी के कायाकल्प का रोडमैप साझा किया। इस मास्टर प्लान के तहत नदी क्षेत्र से अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे और जलभराव क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक गहरीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही, नदी के किनारों पर ‘हरित पट्टी’ (Green Belt) विकसित की जाएगी, जिससे न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण का संतुलन भी बना रहेगा। स्थानीय निवासियों ने इस पहल को भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक ‘संजीवनी’ करार दिया है।
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