नंदिनी अग्रवाल: 19 साल की उम्र में बनीं दुनिया की सबसे युवा महिला CA | गिनीज़ रिकॉर्ड में नाम दर्ज

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नंदिनी अग्रवाल morena

आज हम एक ऐसी लड़की की कहानी लेकर आए हैं जिसने न सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) जैसी कठिन परीक्षा पास की, बल्कि ऐसा कारनामा इतनी कम उम्र में कर दिखाया कि उसका नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया।

हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के मुरैना की रहने वाली नंदिनी अग्रवाल की, जिन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में CA फाइनल एग्ज़ाम में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल किया। इतना ही नहीं, इस उम्र में CA बनकर उन्होंने दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट का ग्लोबल रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।


📚 शुरुआत में ही दिख गया था टैलेंट

नंदिनी की पढ़ाई की शुरुआत बाकी बच्चों से थोड़ी अलग थी। उन्होंने स्कूली शिक्षा के दौरान दो क्लासेस स्किप कर दीं, जिसकी वजह से उन्होंने 13 साल की उम्र में 10वीं और 15 साल में 12वीं की परीक्षा पास कर ली।

उनके स्कूल में एक बार एक गिनीज़ रिकॉर्ड होल्डर आए थे, और वहीं से नंदिनी को यह प्रेरणा मिली कि उन्हें भी कुछ बड़ा करना है – कुछ ऐसा जो दुनियाभर में मिसाल बने।


🧠 CA की तैयारी और पहला बड़ा मुकाम

नंदिनी ने तय कर लिया था कि वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनेगी। और यही नहीं, सबसे कम उम्र में बनेगी। उनके इस सफर में कठिनाइयां भी खूब आईं।

जब वो मात्र 16 साल की थीं, तब कई कंपनियों ने उन्हें इंटर्नशिप देने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि वो बहुत छोटी हैं। लेकिन नंदिनी ने हार नहीं मानी, उन्होंने खुद को साबित किया। धीरे-धीरे उन्हें PwC जैसी बड़ी कंपनी में आर्टिकलशिप का मौका मिला।

नंदिनी अग्रवाल morena

🏆 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड – एक ऐतिहासिक पल

2021 में, जब उनके CA फाइनल के नतीजे आए, तो उन्होंने 800 में से 614 अंक हासिल किए – यानी करीब 76.75% मार्क्स। उनकी उम्र उस वक्त 19 साल और 330 दिन थी। और यहीं से उनका नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया।

नंदिनी ने अपने एक पुराने LinkedIn पोस्ट में लिखा था कि जब उन्होंने गिनीज़ रिकॉर्ड के लिए आवेदन भेजा, तो 6 महीने तक कोई जवाब नहीं आया। वो लगभग मान चुकी थीं कि शायद आवेदन खारिज हो गया। लेकिन एक दिन अचानक उनके फोन पर एक मेल आया – “Congratulations, now you are Guinness World Records Title Holder.”

उन्होंने लिखा – “वो पल मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा मोमेंट था।”


👨‍👩‍👧 माता-पिता का विशेष योगदान

नंदिनी का मानना है कि अगर उनके माता-पिता शुरू से उनके अंदर की क्षमता को न पहचानते, तो शायद ये सब मुमकिन नहीं हो पाता। उन्होंने उनकी पढ़ाई को इस तरह प्लान किया कि वो जल्दी पढ़ाई पूरी कर सकें और अपने लक्ष्य तक जल्द पहुंचें।


🔍 सीख क्या मिलती है?

ध्रुव राठी की तरह कहें तो –

“इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि अगर सोच बड़ी हो और मेहनत लगातार हो, तो कोई भी उम्र तुम्हें रोक नहीं सकती। और हाँ, सिस्टम की चुनौतियों से डरना नहीं है – उन्हें तोड़कर आगे बढ़ना है।”


अगर आप भी किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और बीच में कभी हताश हो जाते हैं, तो नंदिनी की कहानी को याद रखना। क्योंकि सफलता उम्र नहीं, सिर्फ जुनून और लगातार मेहनत देखती है।


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