Mussoorie Sharadotsav : 12 साल बाद आयोजित शरदोत्सव की आखिरी शाम रही यादगार
मसूरी, 11 अक्टूबर 2026। पहाड़ों की रानी मसूरी में 12 साल बाद आयोजित शरदोत्सव की आखिरी शाम लोक गायिका करिश्मा शाह और गायक रुहान भारद्वाज के नाम रही। दोनों कलाकारों ने उत्तराखंड के लोकगीतों और शानदार प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। पहाड़ी सुरों की गूंज और लोक संस्कृति की मिठास ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
Mussoorie Sharadotsav : करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज की जोड़ी ने मचाया धमाल
कार्यक्रम के दौरान करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज ने अपने गीतों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुतियों पर लोगों ने जमकर उत्साह दिखाया और उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीतों का आनंद लिया। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।
सांस्कृतिक संध्या में युवाओं की भागीदारी खास तौर पर देखने को मिली। आधुनिक संगीत के दौर में पहाड़ी लोकगीतों के प्रति युवाओं का उत्साह देखकर कलाकार भी खुश नजर आए।
Mussoorie Sharadotsav : स्थानीय कलाकारों को मंच देना शरदोत्सव की खास पहल
करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज ने कहा कि मसूरी में 12 साल बाद शरदोत्सव का आयोजन होना एक अच्छी पहल है। इस बार उत्सव में उत्तराखंड और मसूरी के स्थानीय कलाकारों को प्रमुखता से मंच दिया गया, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
कलाकारों के मुताबिक, ऐसे आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही क्षेत्र की लोक संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
Mussoorie Sharadotsav : मसूरी के दर्शकों से मिला खास प्यार
दोनों कलाकारों ने कहा कि वे देश-विदेश के कई मंचों पर प्रस्तुति देते हैं, लेकिन मसूरी में दर्शकों से मिला प्यार और उत्साह उनके लिए बेहद खास रहा। यहां के लोगों का पहाड़ी संगीत से जुड़ाव कलाकारों को नई ऊर्जा देता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए यह खुशी की बात है कि उसके गीतों को देश के साथ-साथ विदेशों में भी पसंद किया जाए। उत्तराखंड के लोकगीतों की बढ़ती लोकप्रियता राज्य की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में मदद कर रही है।
Mussoorie Sharadotsav : नई पीढ़ी में बढ़ रहा पहाड़ी लोकगीतों का क्रेज
करिश्मा शाह और रुहान भारद्वाज ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में युवाओं को अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ते देखना सुखद अनुभव है। पहाड़ी गीतों पर युवाओं का उत्साह इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपना रही है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड के लोकगीतों को मिल रही लोकप्रियता आगे भी जारी रहेगी और पहाड़ी संगीत देश के साथ विदेशों में भी अपनी पहचान मजबूत करेगा।
Mussoorie Sharadotsav : नगर पालिका और राज्य सरकार का जताया आभार
दोनों कलाकारों ने शरदोत्सव के आयोजन के लिए नगर पालिका प्रशासन और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अधिक अवसर मिलें।
ऐसे आयोजन उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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