BY
Yoganand Shrivastava
1977 की घटना, दशकों तक लापता रहे आरोपी और शिकायतकर्ता
Mumbai मुंबई की एक अदालत ने वर्ष 1977 में दर्ज महज 7.65 रुपये की चोरी के मामले को करीब पांच दशक बाद बंद कर दिया। इस पुराने प्रकरण में दो आरोपी और एक शिकायतकर्ता शामिल थे, लेकिन लंबे समय तक तलाश के बावजूद न तो आरोपियों का पता चल सका और न ही शिकायतकर्ता सामने आया। समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

गैर-जमानती वारंट के बावजूद नहीं मिली कोई प्रगति
Mumbai अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए थे, फिर भी उनकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। पुराने मामलों के निपटारे की प्रक्रिया के तहत अदालत ने पाया कि इतने वर्षों में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई और मामले को आगे बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है।
‘जरूरत से ज्यादा समय बीत चुका’—कोर्ट की टिप्पणी
Mumbai न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने आदेश में स्पष्ट कहा कि “जरूरत से ज्यादा समय बीत चुका है” और ऐसे में मामले को लंबित रखना निरर्थक होगा। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के तहत दर्ज प्रकरण को समाप्त करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि चोरी की गई 7.65 रुपये की राशि शिकायतकर्ता को लौटाई जाए, और यदि वह उपलब्ध न हो तो नियमानुसार सरकारी खाते में जमा कर दी जाए।
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