मध्य प्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और अब सरकार इसे निवेश और रोजगार के नए अवसरों में बदलने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में आज कटनी में माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0 (MP Mining Conclave 2025) का आयोजन हो रहा है। इस बड़े आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे।
इस कॉन्क्लेव का मकसद राज्य के खनन क्षेत्र को नई दिशा देना, उभरते अवसरों पर निवेश आकर्षित करना और खनिज-आधारित उद्योगों को मजबूत करना है।
कटनी माइनिंग कॉन्क्लेव 2025 की खास बातें
- दो हजार से अधिक प्रतिभागी कॉन्क्लेव में शामिल होंगे।
- कोयला, ऊर्जा, हाइड्रोकार्बन, क्रिटिकल मिनरल्स और चूना पत्थर पर खास फोकस रहेगा।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के उपयोग पर विस्तृत चर्चा होगी।
- कई प्रमुख औद्योगिक घरानों और संस्थानों के साथ एमओयू (MoU) साइन होंगे।
- खनिज संपदा को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
मध्य प्रदेश का खनन क्षेत्र क्यों खास है?
मध्य प्रदेश राष्ट्रीय खनन उत्पादन में बड़ा योगदान देता है। यहां से मिलता है:
- 73% तांबा (Copper)
- 29% रॉक फॉस्फेट
- 26% मैंगनीज
- 9% चूना पत्थर
- 8% कोयला
- 3% बॉक्साइट
- 1% लोह अयस्क (Iron Ore)
यही वजह है कि खनन सेक्टर में निवेश के लिए मध्य प्रदेश देश-विदेश के उद्योगपतियों का ध्यान खींच रहा है।
पहली माइनिंग कॉन्क्लेव की उपलब्धि
प्रदेश में पहली खनिज कॉन्क्लेव भोपाल में अक्टूबर 2024 में आयोजित हुई थी। उस दौरान 11 औद्योगिक संस्थानों से करीब 19,650 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। अब उम्मीद है कि कटनी कॉन्क्लेव में इससे भी बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आएंगे।
कॉन्क्लेव में चर्चा के प्रमुख मुद्दे
- कोयला, चूना पत्थर, तेल और गैस जैसे संसाधनों की संभावनाएं
- खनन कार्यों में ऑटोमेशन, AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत जैसे कोल गैस (CBM)
- डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता
- सीमेंट और खनिज-आधारित उद्योगों के विस्तार की रणनीतियां
क्या मिलेगा राज्य को?
- खनन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
- निवेश से नए रोजगार अवसर पैदा होंगे।
- ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- खनन तकनीक में आधुनिक बदलाव देखने को मिलेंगे।
MP Mining Conclave 2025 सिर्फ निवेशकों और उद्योगों के लिए मंच नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की खनिज संपदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी और निवेशकों से सीधे संवाद इसे और भी महत्वपूर्ण बना रहा है।





