BY: MOHIT JAIN
भारतीय वायुसेना की रीढ़ कहा जाने वाला मिग-21 फाइटर जेट शुक्रवार को इतिहास बन गया। चंडीगढ़ एयरबेस पर हुए विशेष समारोह में इस सुपरसोनिक जेट ने आखिरी उड़ान भरी। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 23 स्क्वाड्रन के पांच अन्य विमानों के साथ इसकी अंतिम उड़ान का नेतृत्व किया। इस मौके पर स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी फ्लाईपास्ट का हिस्सा बनीं।
युद्धों से लेकर स्ट्राइक्स तक रहा अहम साथी

1963 में वायुसेना में शामिल हुआ मिग-21 केवल एक विमान नहीं, बल्कि भारत की हवाई शक्ति का प्रतीक था।
- 1965 का भारत-पाक युद्ध: पहली बार युद्ध के मैदान में अपनी ताकत दिखाई।
- 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम: पाकिस्तानी एयरबेस तबाह कर भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई।

- 1999 का कारगिल युद्ध: दुर्गम पहाड़ियों में दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त किया।

- 2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक: ग्रुप कैप्टन अभिनन्दन वर्धमान ने इसी विमान से पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “मिग-21 का योगदान किसी एक युद्ध तक सीमित नहीं है। कारगिल से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक इसने हर मोर्चे पर भारतीय वायुसेना को मजबूती दी।”
गौरव और विवाद दोनों का हिस्सा
मिग-21 को भारत का पहला सुपरसोनिक जेट माना जाता है, जो आवाज की रफ्तार से भी तेज उड़ सकता था। भारत में करीब 850 मिग-21 रहे, लेकिन इसकी पहचान सिर्फ शौर्य तक सीमित नहीं रही। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 400 से अधिक मिग-21 हादसों का शिकार हुए, जिनमें 200 से ज्यादा पायलटों ने जान गंवाई। इसी कारण इसे ‘उड़ता ताबूत’ और ‘विवो मेकर’ जैसे नाम भी मिले।
रूस-भारत मित्रता की मिसाल
मिग-21 की कहानी भारत और रूस की गहरी साझेदारी का भी प्रतीक है। 1962 में रूस से खरीद की बातचीत हुई और 1963 में पहली खेप वायुसेना में शामिल हुई। 1967 से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसका उत्पादन भारत में ही शुरू कर दिया। यह उस दौर का गेम-चेंजर साबित हुआ।
विदाई समारोह की झलक

चंडीगढ़ एयरबेस पर हुए कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहे।
- मिग-21 को वॉटर गन सैल्यूट दिया गया।
- सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने आसमान में अद्भुत करतब दिखाकर सम्मान जताया।
- एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद इसकी आखिरी उड़ान भरकर इसे श्रद्धांजलि दी।
अब तेजस संभालेगा जिम्मेदारी
मिग-21 के रिटायर होने के बाद अब इसकी जगह स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस LCA मार्क 1A भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा। यह पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित है और आने वाले दशकों में देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा करेगा।
मिग-21 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं था, बल्कि भारत की हवाई शक्ति और वीरता का प्रतीक रहा। 62 साल तक आसमान की ऊंचाइयों पर भारत का गौरव बढ़ाने वाला यह विमान आज भले ही विदाई ले चुका हो, लेकिन इसका इतिहास हमेशा भारतीय वायुसेना की शौर्यगाथा में सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा।





