Middle East Tension : मिडिल-ईस्ट में फिर तनातनी,जंग से हलाकान, दुनिया परेशान
Middle East Tension : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच लगातार बढ़ती तनातनी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच अमेरिका की सक्रियता ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। इजराइल लगातार ईरान समर्थित संगठनों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई और कड़े बयान देकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने युद्धपोत और सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ाकर यह संकेत दे दिया है कि वह किसी भी बड़े संघर्ष की स्थिति में पीछे नहीं हटेगा। अब यदि यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। जंग से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक व्यापार में बाधा और इंटरनेट व डिजिटल नेटवर्क पर असर जैसी बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी इसका सीधा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या अमेरिका और इसराइल फिर से ईरान पर हमले की तैयारी कर रहे हैं? क्या मिडिल ईस्ट में फिर तनातनी बढ़ने वाली है।।।इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे, लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।

Middle East Tension : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है।अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात की ओर धकेल दिया है। इजराइल और ईरान के बीच हाल के दिनों में ड्रोन हमले, मिसाइल स्ट्राइक और तेल आपूर्ति पर खतरे ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। साथ ही ये आशंका भी, कि किसी भी वक्त स्थिति किसी बड़े संघर्ष में बदल सकती है। दरअसल जंग के दौरान अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को काफी मजबूत किया है।एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ाई गई है।इसे 2003 के इराक युद्ध के बाद क्षेत्र में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा बताया जा रहा है। उधर इजराइल भी लगातार ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए है। इजराइल का कहना है कि ईरान की मिसाइल और परमाणु गतिविधियां उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। तो वहीं ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उस पर हमला बढ़ा तो वह सिर्फ सैन्य जवाब ही नहीं देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और डिजिटल नेटवर्क को भी प्रभावित कर सकता है। अब दोबारा बढ़ती युद्ध की आशंकाओं के बीच एक बार फिर अमेरिका ने ईरान के साथ शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पांच शर्तें रखी हैं। जिसमें…
Middle East Tension : साथ ही ऐसा न करने पर ओमान सागर को अमेरिकी सेना का कब्रगाह बनाने की धमकी दे डाली है। उधर ट्रम्प ने मिडिल-ईस्ट का नक्शा अमेरिकी झंडे के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया है। ईरान जंग के बीच उनकी इस पोस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि ट्रम्प ने पोस्ट के साथ कोई बयान नहीं लिखा। लेकिन तनाव के बीच आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका अगले 24 से 48 घंटों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू कर सकता है। ऐसे में कतर, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों ने एयरस्पेस सुरक्षा बढ़ा दी है। कई देशों में ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया गया है। यूएई के परमाणु संयंत्र के पास ड्रोन हमले की घटना ने चिंता और बढ़ा दी है।
Middle East Tension : बहरहाल अब यदि यह तनाव खुली जंग में बदलता है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की रणनीति ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसी रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यह तनाव और बढ़ा, तो इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए भी यह चिंता का विषय बन सकता है। अब भले ही पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता से शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में मिडिल ईस्ट का संकट केवल दो देशों की लड़ाई नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। यही वजह है कि अब अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती जंग जीतना नहीं, बल्कि स्थायी शांति स्थापित करना है।।।।
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