Mahabharat Cultural Fest: वीर भारत न्यास द्वारा भारत भवन में आयोजित महाभारत समागम के सातवें दिन दर्शकों ने कला और संस्कृति का अनोखा संगम देखा। इस दिन बहिरंग, पूर्वरंग और अंतरंग सभागार में विभिन्न प्रस्तुति विधाओं के माध्यम से महाभारत कथा का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ।

Mahabharat Cultural Fest: कठपुतली नाट्य में युद्ध की त्रासदी
बहिरंग मंच पर अनुरूपा राय के निर्देशन में कठकला पपेट आर्ट्स ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा प्रस्तुत महाभारत ने युद्ध, भाग्य, अहंकार और धर्म की गहन त्रासदी को उजागर किया। कथा में गांधारी, कृष्ण और बर्बरीक जैसे प्रमुख पात्रों के माध्यम से युद्ध के नैतिक और दार्शनिक पहलू सामने आए। गांधारी का त्याग और पीड़ा का जीवन, कृष्ण का रणनीतिक कौशल और बर्बरीक का निष्कर्ष दर्शकों को भावुक कर गया।

Mahabharat Cultural Fest: सौगंधिका हरणम् में भीम-हनुमान मिलन
अंतरंग सभागार में पियाल भट्टाचार्य के निर्देशन में मंचित सौगंधिका हरणम् ने पांडवों के वनवास काल की कथा प्रस्तुत की। भीम की शक्ति, वन की रहस्यमयता और हनुमान द्वारा धर्म, विवेक और विनय का संदेश दर्शकों के समक्ष जीवंत हुआ।

Mahabharat Cultural Fest: पंडवानी गायन में लोकसंस्कृति का जादू
पूर्वरंग मंच पर छत्तीसगढ़ की लोकगायिका रितु वर्मा द्वारा प्रस्तुत पंडवानी ने महाभारत और पांडवों की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। भावपूर्ण गायन, सरल लोकभाषा और नाटकीय अभिनय के माध्यम से वीरता, धर्म और न्याय के प्रसंग दर्शकों के मन में गूंज उठे।

Mahabharat Cultural Fest: कठपुतली समारोह से हुआ शुभारंभ
अभिरंग रंगमंच पर विशेष कठपुतली समारोह का शुभारंभ कोलकाता के डॉल्स थियेटर द्वारा प्रस्तुत “द आर्चर हू स्टूड अलोन” के माध्यम से हुआ। इस नाटक ने गुरु, भक्ति और त्याग की गहरी शिक्षा दी।

आज की प्रस्तुतियाँ:
महाभारत समागम के आठवें दिन पूर्वरंग मंच पर पृथ्वीराज क्वाथर द्वारा यक्षगान, अंतरंग सभागार में निवेदिता महापात्रा द्वारा द्रौपदी, और बहिरंग मंच पर जयंत देशमुख निर्देशित मृत्यंजय का प्रदर्शन होगा।

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इस समागम ने दर्शकों को महाभारत की कथाओं, कठपुतली कला और लोकगायन के माध्यम से भारतीय सभ्यता और संस्कृति का सजीव अनुभव कराया।





