जानिए, महाभारत काल से जुड़ी रहस्यों से भरी कुण्ड की कहानी
रिपोर्ट- बॉबी अली भगवां
छतरपुर : जिले के मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में बड़ामलहरा तहसील से करीब दस किलोमीटर दूरी पर एक गुफा में भीम कुण्ड स्थित है भीम कुंड न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने गहरे रहस्यमयी इतिहास और पौराणिक कथाओं के लिए भी विख्यात है यह कुंड सदियों से लोगों के लिए एक अद्भुत और चमत्कारी स्थल बना हुआ है, जिसकी गहराई का आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है।
महाभारत काल से जुड़ा गहरा इतिहास
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भीम कुंड का संबंध सीधे महाभारत काल से है। ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में समय बिताया था। कहा जाता है कि जब द्रोपदी को प्यास लगी और उन्हें कहीं पानी नहीं मिला, तब महाबली जिनके बाजुओं में दस हज़ार हाथी का बल था,भीम ने अपनी गदा के प्रहार से धरती को चीरकर इस कुंड का निर्माण किया था। यही कारण है कि इसे ‘भीम कुंड’ कहा जाता है।

प्राकृतिक आपदाओं का सूचक
भीम कुंड की एक और रहस्यमयी विशेषता यह है कि ऐसा माना जाता है कि यह कुंड देश और दुनिया में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वाभास देता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आने वाली होती है, तो कुंड का जल स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है या उसमें तेज हलचल होती है। सन 2000 में गुजरात के भूकम्प, और मुंबई में आयी सुनामी के के पहले यंहा कुंड में बड़ी हलचल पैदा हुई थी।

अतुल्य गहराई का रहस्य
इस कुंड की सबसे बड़ी विशेषता इसकी असीमित गहराई है। कई बार विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इसकी गहराई मापने का प्रयास किया है, लेकिन आज तक कोई भी इसकी तलहटी तक नहीं पहुंच पाया है। कहा जाता है कि कुंड का पानी इतना साफ और नीला है कि नीचे की ओर देखने पर भी केवल अथाह गहरायी ही दिखाई देती है। यह भी माना जाता है कि कुंड का पानी कभी नहीं सूखता, चाहे कितनी भी गर्मी क्यों न पड़े आकर्षण का केंद्र और पर्यटन स्थल भीम कुंड आज एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल बन गया है दूर-दूर से लोग इस रहस्यमयी कुंड के दर्शन करने और इसकी कहानियों को जानने के लिए आते हैं। शांत वातावरण और हरे-भरे पेड़ों से घिरा यह स्थल पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग भी इस कुंड के महत्व को समझते हुए इसके संरक्षण और विकास के लिए प्रयासरत हैं भीम कुंड सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि इतिहास, आध्यात्मिकता और अनसुलझे रहस्यों का एक संगम है, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है भीमकुंड के मंदिर में अध्यक्ष महंत ने बताया आज तक कई लोग भीमकुंड की गहराई पता लगाने का प्रयास कर चुके हैं पर फेल रहे के लिए भी यह रहस्य बना हुआ है। गोताखोर 700 फीट तक नीचे चले गए लेकिन उन्हें दूसरा छोर नहीं मिला, लहरों के तेज प्रवाह के कारण उन्हे वापस ऊपर आना पड़ा पहाड़ो और घने जंगलो के बीच बसा हुआ भीम कुंड कहा जाता है, भीमकुंड के पानी में कई प्रकार की औषधियां है वहां नहाने से चर्म रोग जैसे कई रोग दूर होते हैं कुंड पहाड़ के बीचो-बीच स्थित है जहां बरसात की कुछ बूँद तो पहुंच ही पाती हैं लेकिन इसके बावजूद भी कुंड का पानी कभी खाली नहीं होता इसके अलावा कुंड का पानी गहरा नीले कलर का जबकि आसपास के और जल स्रोतों का पानी मट मैला है जो भी एक रहस्य बना हुआ है, पृथ्वी पर अनगिनत ऐसे रहस्य छुपे हैं जिनकी सच्चाई को सामने लाने में विज्ञान अब तक असफल रहा है। मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले में स्थित भीम सा ही एक रहस्य जो आज भी वैज्ञानिक कौतूहल और जिज्ञासा का केन्द्र है।





