Indo-German Gateway Program : इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम से एमएसएमई को मिलेगी वैश्विक पहचान
Indo-German Gateway Program : उत्तर प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और जर्मनी के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से मुलाकात की।बैठक में उत्तर प्रदेश और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और एमएसएमई इकाइयों के वैश्विक विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने तकनीक, कौशल और कारोबारी साझेदारी के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया।
Indo-German Gateway Program : एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में यूपी
एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में निवेशकों के लिए पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल तैयार करने पर सरकार लगातार काम कर रही है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के कुल एमएसएमई का करीब 14 प्रतिशत हिस्सा है। प्रदेश में लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं। कृषि के बाद एमएसएमई सेक्टर रोजगार उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है।
Indo-German Gateway Program : जर्मनी के साथ व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई गति
बैठक में भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री के अनुसार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 31.01 बिलियन डॉलर का है। यूरोपीय संघ को उत्तर प्रदेश से होने वाले कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी करीब 19.8 प्रतिशत बताई गई।उत्तर प्रदेश से जर्मनी को हर साल 404.20 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात होता है। इसमें रेडीमेड वस्त्र, चर्म उत्पाद, फुटवियर, कालीन और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे उत्पाद प्रमुख हैं।
Indo-German Gateway Program : दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा यूपी का निर्यात
सरकार के मुताबिक उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात करीब 18.2 बिलियन यूरो यानी लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।सरकार अब एमएसएमई इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर उनके लिए नए कारोबारी अवसर खोलने पर जोर दे रही है। जर्मनी के साथ सहयोग को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
Indo-German Gateway Program : 12 महीने का होगा इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम
इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम को 12 महीने के संरचित कार्यक्रम के तौर पर तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम जर्मनी के इनोवेशन हब राइन-मेन और जीआईबीए के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।इसके तहत चयनित एमएसएमई और स्टार्टअप्स को जर्मनी के बाजार में प्रवेश से जुड़ी जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें जर्मनी में कानूनी कंपनी स्थापित करने, स्थानीय बाजार को समझने और विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क बनाने में मदद शामिल है।
Indo-German Gateway Program : प्रिसीजन इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिक वाहन तक सहयोग
कार्यक्रम के तहत कई आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और रीसाइक्लिंग जैसे सेक्टरों को संभावित सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना गया।इस साझेदारी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को जर्मनी की तकनीक, बाजार और कारोबारी नेटवर्क से जोड़ना है। इससे स्थानीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
Indo-German Gateway Program : जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की
जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश में विकसित किए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी वातावरण की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम में केवल बड़ी कंपनियों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, बल्कि स्पष्ट विजन और विकास की क्षमता रखने वाली एमएसएमई और स्टार्टअप इकाइयों को भी अवसर दिया जाएगा।जर्मन प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाने में भी रुचि दिखाई। इसके अलावा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से भविष्य में व्यापारिक और कारोबारी संपर्क को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
Indo-German Gateway Program : जर्मन उद्यमियों को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का न्योता
एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने जर्मन उद्यमियों और प्रतिनिधियों को 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में शामिल होने का न्योता दिया।उन्होंने कहा कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और कारोबारी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। जर्मन कंपनियों और प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों के बीच सीधे कारोबारी संपर्क से नई साझेदारियों की संभावना बन सकती है।
Indo-German Gateway Program : पहले चरण में चुनी जाएंगी ग्लोबल विस्तार की क्षमता वाली इकाइयां
इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के शुरुआती चरण में ऐसी एमएसएमई और स्टार्टअप इकाइयों की पहचान की जाएगी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार की क्षमता है। इसके बाद उन्हें जर्मनी के बाजार में प्रवेश और वहां कारोबारी नेटवर्क विकसित करने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।इससे प्रदेश की छोटी और मध्यम औद्योगिक इकाइयों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही तकनीकी सहयोग और विदेशी निवेश के नए रास्ते भी खुलने की उम्मीद है।
Indo-German Gateway Program : व्यापार, तकनीक और कौशल पर बनेगा दीर्घकालिक सहयोग
उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि जर्मनी के साथ साझेदारी केवल निर्यात और निवेश तक सीमित नहीं रहेगी। तकनीकी ज्ञान, कौशल विकास, नवाचार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी दीर्घकालिक साझेदारी विकसित की जा सकती है।मंत्री ने कहा कि भारत-जर्मनी सहयोग से प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। सरकार इसे व्यापार, तकनीक, निवेश और कौशल के क्षेत्र में भविष्य की साझेदारी के लिए मजबूत आधार के रूप में देख रही है।
Indo-German Gateway Program : बैठक में जर्मन प्रतिनिधिमंडल के कई प्रमुख सदस्य रहे मौजूद
बैठक में जर्मन प्रतिनिधिमंडल की ओर से राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकाइंड, जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस के सीईओ निर्मल रमण कन्नाइयन और चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी मौजूद रहे।उत्तर प्रदेश की ओर से प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल, विशेष सचिव शिशिर समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के जरिए दोनों पक्षों ने एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने और प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
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