BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली : केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 (IMC 2025) में आयोजित नेशन बिल्डर्स समिट को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने सेवाक्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर डिजिटल इनोवेशन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी ताकत के रूप में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है।
सिंधिया ने कहा कि कभी सेवाक्षेत्र पर निर्भर रहने वाला भारत आज डिजिटल सेवाओं से लेकर हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर चिप्स तक का “वर्टिकल इंटीग्रेशन” कर चुका है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि को दिया, जिन्होंने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहल के माध्यम से बीते 11 वर्षों में इस क्रांति की मजबूत नींव रखी।
उन्होंने कहा, “भारत जो कभी चिप निर्माण की कल्पना भी नहीं कर सकता था, आज गुजरात से लेकर असम तक सेमीकंडक्टर फैब्स बना रहा है। यह डिजिटल क्रांति उसी तरह की है जैसे औद्योगिक क्रांति के दौर में रेल और सड़क नेटवर्क ने समाज को जोड़ा था।”
सिंधिया ने बताया कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा डिजिटल राष्ट्र बन चुका है, जहां 1.2 अरब मोबाइल उपभोक्ता, 974 मिलियन इंटरनेट यूजर और 944 मिलियन ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के 46% डिजिटल लेन-देन भारत में UPI के जरिए होते हैं, जिसकी वार्षिक राशि 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। “भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है, जिसने करोड़ों नागरिकों को डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया है,” उन्होंने कहा।
मंत्री ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की अभूतपूर्व वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 15 साल पहले जहां कुछ ही स्टार्टअप थे, वहीं आज भारत में 1.8 लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न कंपनियां हैं। उन्होंने कहा कि यह लहर अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है — “आज स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कई कंपनियां टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं। हर छोटे शहर और जिले से उद्यमशीलता की नई ऊर्जा उठ रही है।”
सिंधिया ने इस परिवर्तन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 73 हजार से अधिक महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप आज भारत की विकास यात्रा के सशक्त चालक बन चुके हैं। उन्होंने कहा, “अगर भारत को अमृतकाल से शताब्दी काल तक पहुंचना है, तो हर नागरिक, खासकर महिलाएं, नए भारत के निर्माण में समान भागीदार बनें।”
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एंडी ग्रोव के प्रसिद्ध कथन “परिवर्तन ही एकमात्र स्थायी चीज है” और “सिर्फ सतर्क लोग ही जीवित रहते हैं” का हवाला दिया, यह कहते हुए कि यही विचार आज भारतीय उद्यमिता की आत्मा बन चुके हैं।
सिंधिया ने कहा कि अब सरकार और उद्योग के बीच का रिश्ता ‘नियामक से सहयोगी’ में बदल गया है — “सरकार रनवे प्रदान करती है, और उद्यमी उड़ान भरते हैं।” उन्होंने कहा, “यह दशक भारत के लिए निर्णायक है। अब समय आ गया है कि हम सिर्फ ‘वोकल फॉर लोकल’ नहीं, बल्कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ बनें — भारत में डिजाइन करें, भारत में समाधान दें और पूरी दुनिया के लिए उसे स्केल करें।”





