किसानों को मिलेगी राहत! गोविंद सिंह राजपूत ने MP में बनाया धान-गेहूं उपार्जन का नया निगरानी तंत्र

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govind singh rajput

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने धान और गेहूं के उपार्जन, परिवहन और भंडारण में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक नया निगरानी तंत्र विकसित करने का फैसला किया है। इसके तहत मुख्यालय स्तर पर एक कंट्रोल कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जिससे पूरे प्रदेश में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।

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क्या होगा नए सिस्टम में?

  • GPS सिस्टम: धान और चावल के परिवहन के दौरान सभी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा। इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि कहीं भी गड़बड़ी न हो।
  • कंट्रोल कमांड सेंटर: यह सेंटर खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ेगा। इससे धान, गेहूं और चावल की मात्रा, परिवहन और मिलिंग की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।
  • रैंडम जांच: धान की मिलिंग के दौरान सीएमआर (Customs Milling Report) की रैंडम जांच की जाएगी ताकि चावल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

क्यों जरूरी है यह कदम?

पिछले कुछ समय से धान और गेहूं के उपार्जन, परिवहन और भंडारण में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। इनमें सहकारिता विभाग की समितियों की संलिप्तता भी देखी गई है। इसलिए, सरकार ने इन गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया है।

क्या कहा खाद्य मंत्री ने?

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि उपार्जन, परिवहन और भंडारण में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन जिलों में कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा गड़बड़ी की गई है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

तीन सदस्यीय दल गठित

धान की मिलिंग के बाद चावल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक तीन सदस्यीय दल बनाया गया है। इस दल में नागरिक आपूर्ति निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह दल समय-समय पर जिलों में जाकर जांच करेगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई करेगा।

किसानों को राहत

इस नए सिस्टम से किसानों को भी राहत मिलेगी। अक्सर धान और गेहूं के उपार्जन में देरी और गड़बड़ी के कारण किसानों को भुगतान में देरी होती है। नए निगरानी तंत्र से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों को समय पर उनका पैसा मिले।

आगे की राह

सरकार का यह कदम धान और गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर यह सिस्टम सही तरीके से लागू होता है, तो प्रदेश में कृषि उत्पादों के उपार्जन और वितरण में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।

नोट: यह नई व्यवस्था जल्द ही लागू की जाएगी और इसके सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।

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