गुरुग्राम: गुरुग्राम पुलिस ने एक शख्स पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो नशे में था लेकिन गाड़ी नहीं चला रहा था। यह मामला तब सामने आया जब उस शख्स ने रेडिट पर अपनी कहानी शेयर की। उसने बताया कि वह एक पार्टी से लौट रहा था और उसकी गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया। हालांकि, गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर पूरी तरह से सोबर था, फिर भी पुलिस ने उस पर जुर्माना लगा दिया।
क्या हुआ था?
उस शख्स ने रेडिट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि वह एक पार्टी से लौट रहा था और उसकी गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया। उसने माना कि वह नशे में था, लेकिन गाड़ी उसका निजी ड्राइवर चला रहा था। पुलिस ने ड्राइवर की जांच की और पाया कि वह पूरी तरह से सोबर था। गाड़ी में कोई शराब भी नहीं मिली। फिर भी, पुलिस ने उस शख्स पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया, सिर्फ इसलिए कि वह नशे में था।
उस शख्स ने लिखा, “पुलिस ने मुझसे पूछा कि क्या मैंने शराब पी है, जो साफ दिख रहा था। उन्होंने गाड़ी में शराब की बोतलें तलाशीं, लेकिन कुछ नहीं मिला। फिर भी, उन्होंने मुझसे 1,000 रुपये वसूले, सिर्फ इसलिए कि मैं नशे में था।”
लोगों की क्या राय है?

यह पोस्ट वायरल हो गई और लोगों ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा, “यह कैसे हो सकता है? अगर ऐसा है तो लोग बार से कैसे लौटेंगे?” वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “लगता है पुलिस ने आपसे पैसे ऐंठ लिए।”
एक यूजर ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा, “मैं भी गुरुग्राम में नशे में था और पुलिस ने मुझे रोक लिया। मैंने मान लिया कि मैंने शराब पी है, लेकिन मैंने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं। पुलिस ने मेरी गाड़ी का नंबर और मेरा फोन लेकर मुझे जाने दिया। मुझे कोई चालान नहीं मिला।”
क्या कहता है कानून?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत, शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में गाड़ी चलाना एक दंडनीय अपराध है। पहली बार अपराध करने पर 6 महीने की जेल या 10,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों हो सकता है। दूसरी बार अपराध करने पर सजा बढ़कर 2 साल की जेल या 15,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों हो जाता है। हालांकि, यह कानून सिर्फ ड्राइवर पर लागू होता है, यात्री पर नहीं।
निष्कर्ष:
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। अगर कोई शख्स नशे में है लेकिन गाड़ी नहीं चला रहा है, तो उस पर जुर्माना लगाना कितना सही है? यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।





