BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर जारी विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में आजाद समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता दामोदर यादव ने बड़ा बयान दिया है। शनिवार को ग्वालियर पहुंचे यादव ने स्पष्ट तौर पर कहा कि देश का हर न्यायालय बाबा साहब के बनाए संविधान के तहत संचालित होता है, इसलिए कोर्ट परिसरों में उनकी प्रतिमा लगाना केवल जरूरी ही नहीं, बल्कि न्यायसंगत भी है।
“प्रतिमा रोकना दुर्भावनापूर्ण सोच का प्रतीक”
दामोदर यादव ने आरोप लगाया कि डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने का विरोध करना एक संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ वर्ग संविधान निर्माता के सम्मान में बाधा बन रहे हैं। यह सिर्फ घृणित नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।”
BM राव नहीं, असली संविधान निर्माता बाबा साहब
यादव ने स्पष्ट किया कि कुछ लोग जानबूझकर “बीएम राव” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मूल मुद्दे से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि “यदि कोई दूसरी मूर्ति जबरन लगाने की कोशिश करता है, तो आजाद समाज पार्टी उसका विरोध करेगी।”
“कोर्ट चलाते हैं बाबा साहब का संविधान”
दामोदर यादव ने वकीलों और न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए कहा, “जो वकील काला कोट पहनकर पेशी पर जाते हैं और जो न्यायधीश निर्णय सुनाते हैं, वे सभी बाबा साहब द्वारा बनाए गए संविधान के अनुसार काम करते हैं। फिर उसी संविधान निर्माता को सम्मान न देना दोहरा मापदंड है।”
जाति नहीं, संविधान सर्वोपरि
यादव ने अपनी जातीय पहचान का हवाला देते हुए कहा कि “मैं यादव हूं, लेकिन धर्म, जाति और आस्था से ऊपर संविधान है। अगर हम सच्चे लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, तो फिर हमें जातिवादी सोच से ऊपर उठकर बाबा साहब के योगदान को स्वीकार करना होगा।”





