सोने को हमेशा से अस्थिरता के समय में एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है, यह वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य है और क्रिप्टोकरेंसी की तरह सिर्फ डिजिटल नहीं बल्कि इसका ठोस और असली मूल्य होता है। यही वजह है कि अब चीन ने सोने को लेकर एक बड़ी वैश्विक चाल चली है।
चीन ने पहली बार हांगकांग में खोला गोल्ड स्टोरेज वॉल्ट
चीन ने हांगकांग में पहली बार एक गोल्ड स्टोरेज वॉल्ट (सोने का भंडारण केंद्र) शुरू किया है। यह कदम सिर्फ एक सामान्य व्यापारिक सुविधा नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर बड़े रणनीतिक बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।
आखिर यह इतना अहम क्यों है?
चीन में एक बहुत बड़ा गोल्ड एक्सचेंज है जिसे शंघाई गोल्ड एक्सचेंज कहा जाता है। यह ठीक वैसे ही काम करता है जैसे स्टॉक मार्केट, फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें स्टॉक्स नहीं, बल्कि सोने की ट्रेडिंग होती है। खास बात यह है कि यह एक्सचेंज चीन के केंद्रीय बैंक यानी पीपल्स बैंक ऑफ चाइना के नियंत्रण में है।
अब तक यह एक्सचेंज केवल चीन के मुख्य भूभाग (मेनलैंड) में काम कर रहा था। लेकिन अब चीन ने इसे पहली बार बाहर यानी हांगकांग में विस्तार देते हुए बुलियन वॉल्ट खोला है।
क्या हैं चीन के नए गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स?
इसके साथ ही चीन ने नए गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स भी लॉन्च किए हैं। ये कॉन्ट्रैक्ट्स ऐसे वित्तीय समझौते हैं जिनमें खरीदार और विक्रेता तय शर्तों के आधार पर सोने का व्यापार कर सकते हैं। इस कदम का मुख्य मकसद गोल्ड ट्रेड को आसान बनाना है।
ट्रेडिंग अब चीनी मुद्रा ‘युआन’ में
सबसे अहम बात यह है कि इन ट्रेड्स को अब अमेरिकी डॉलर की बजाय चीन की अपनी मुद्रा युआन में किया जाएगा। ट्रेडिंग के लिए दो विकल्प होंगे:
- नकद भुगतान (Cash Settlement)
- सोने की भौतिक डिलीवरी (Physical Delivery)
क्या चीन अमेरिकी डॉलर को चुनौती दे रहा है?
दुनिया में अभी भी ज्यादातर गोल्ड ट्रेडिंग अमेरिकी डॉलर यानी ग्रीनबैक में होती है। अधिकतर बड़े सौदे न्यूयॉर्क या लंदन के जरिए किए जाते हैं। लेकिन अब चीन अपने इस कदम से एक नया विकल्प पेश कर रहा है, जो न सिर्फ गोल्ड ट्रेडिंग को युआन में करेगा, बल्कि डॉलर पर निर्भरता भी कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डीडॉलराइजेशन की तरफ बढ़ती दुनिया
डीडॉलराइजेशन का मतलब है — वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका को कम करना। पहले जब भी डीडॉलराइजेशन की बात होती थी, तो विकल्प के रूप में यूरो या युआन पर चर्चा होती थी। लेकिन अब सोना खुद एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।
सेंट्रल बैंकों में बढ़ रही है सोने की खरीद
दुनियाभर के सेंट्रल बैंक तेजी से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- पूरी दुनिया में सेंट्रल बैंकों के पास अब 35,000 मीट्रिक टन से ज्यादा सोना है।
- यह कुल अब तक निकाले गए सोने का करीब पांचवां हिस्सा है।
- भारत का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी पीछे नहीं है। अप्रैल 2024 में RBI के पास लगभग 879 टन सोना था, जिसकी कीमत करीब 97 अरब डॉलर आंकी गई थी।
सोने की घर वापसी पर भी बढ़ा दबाव
सिर्फ खरीद ही नहीं, बल्कि अब कई देश अपने विदेशों में जमा सोने को वापस बुलाने पर भी जोर दे रहे हैं। उदाहरण के लिए:
- जर्मनी और इटली जिनके पास दुनिया में दूसरे और तीसरे सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व हैं,
- इन दोनों देशों का कुछ सोना अभी भी अमेरिका में जमा है, जिसकी कुल कीमत करीब 245 अरब डॉलर बताई जाती है।
अमेरिका की अस्थिर नीतियों, ट्रंप प्रशासन के फैसलों और वैश्विक तनाव को देखते हुए इन देशों में अपने सोने को वापस लाने की मांग तेज हो रही है।
गोल्ड आधारित नया वैश्विक आर्थिक ट्रेंड
हाल ही में हुए एक सर्वे में शामिल 75 सेंट्रल बैंकों में से:
- 40% बैंकों ने कहा कि वे अगले दस सालों में अपने गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी करेंगे।
चाहे बात चीन की हो या पश्चिमी देशों की, एक बात साफ है — सोना फिर से वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत भूमिका निभाने जा रहा है। डीडॉलराइजेशन की दिशा में अब गोल्ड अहम हथियार बनता दिख रहा है।
निष्कर्ष: क्या सोने में निवेश का यह सही समय है?
दुनियाभर में जो बदलाव हो रहे हैं, उन्हें देखकर यह कहा जा सकता है कि सोना न सिर्फ निवेश के लिहाज से, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। ऐसे में अगर आप भी गोल्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह वक्त नजर बनाए रखने का है।





