पंडित मुस्तफ़ा आरिफ
आध्यात्मिक रचनाकार मुंबई
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जब पद की शपथ लेने जा रहे थे, तब उन्हें भारत के सबसे अधिक शिक्षित मुख्यमंत्रियों में गिना गया। समय-समय पर उन्होंने अपनी विद्वता, समझदारी और दूरदर्शिता को विभिन्न अवसरों पर साबित भी किया है। उनके निर्णय और कार्यशैली कई बार भागवद गीता में बताए गए श्रीकृष्ण के उपदेशों की याद दिलाते हैं।

सामूहिक विवाह में शामिल होकर पेश की अद्भुत मिसाल
हाल ही में मुख्यमंत्री ने अपने पुत्र डॉ. अभिमन्यु के विवाह को सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल कर 21 अन्य जोड़ों के साथ संपन्न करवाया। यह निर्णय देश के सक्षम और धनाढ्य नेताओं के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया है। यदि समाज के प्रभावशाली लोग इस पहल का अनुसरण करें, तो गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह के भारी खर्च और दहेज जैसी कुरीतियों से बड़ी राहत मिल सकती है।
गीता जयंती और अध्याय पाठ से सांस्कृतिक चेतना का विस्तार
डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में 1 दिसंबर को गीता जयंती को सांस्कृतिक गौरव के साथ मनाने की पहल की है। वहीं 30 नवंबर को पूरे प्रदेश में गीता के 15वें अध्याय के पाठ का आयोजन कर उन्होंने समाज को आध्यात्मिकता, एकता और कर्मयोग की दिशा में एक सार्थक संदेश दिया है।

नेतृत्व में सरलता और आध्यात्मिकता का समन्वय
डॉ. मोहन यादव का व्यक्तित्व सहजता, सरलता, सज्जनता और भक्ति-भाव से निर्मित है। स्वयं एक अवसर पर उन्होंने फोन पर पूछा कि सरकार कैसी चल रही है। उत्तर में उन्हें यही बताया गया कि उनकी सादगी, संवेदनशीलता और भक्तिभाव ही शासन को सार्थक दिशा दे रहे हैं। यही गुण एक आदर्श और सफल नेतृत्व की पहचान होते हैं-और यही श्रीकृष्ण का संदेश भी है।
कुल मिलाकर, डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व, व्यक्तित्व और शासन शैली एक अविस्मरणीय छाप छोड़ रही है, जो समाज को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करती है।





