
Hasya Hathauda 14 : कमाई की दौड़, रिश्तों की होड़, खुशियों की EMI पर ज़िंदगी !
भैया, ना खुशियाँ खरीद पाया, ना ग़मों का ठेला खोल पाया, फिर भी हर सुबह “सेल” लगा कर कमाने निकल आया। जेब में सपने, माथे पर पसीना, ज़िंदगी बोली, भाई, तू है बड़ा नगीना ! नारी को जो सताए, उसका इतिहास मिट जाए, रावण, कौरव, कंस सबक बन जाए। संत












