- Advertisement -
Ad imageAd image

स्वदेश स्पेशल

धनंजय सिंह

कट्टा कमर पर, राजनीति दिल में — धनंजय सिंह की कहानी!

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके को लेकर एक कहावत है—यहां की मिट्टी में लोहा है, इसलिए यहां के लोग निडर और जज्बे से भरे होते हैं। इन्हीं निडर चेहरों में एक नाम है—धनंजय सिंह, पूर्व सांसद और बाहुबली छवि के लिए कुख्यात। आइए जानते हैं उनके जीवन के उस दौर

मोर सिंह गुर्जर

जब चंबल बोला — राजा तो सिर्फ मोर सिंह! पढ़िए बीहड़ों से लेकर राजनीति तक का सफर

चंबल की बीहड़ों की जब भी बात होती है, डाकुओं की कहानियां अपने आप ज़ुबां पर आ जाती हैं। इनमें से कुछ डकैत ऐसे रहे जिन्होंने खौफ के साथ-साथ लोगों के दिलों में एक अलग ही छवि बनाई। उन्हीं में से एक नाम है — मोर सिंह गुर्जर। कभी उसे

पाकिस्तान वक्फ सिस्टम

वक्फ पर पाकिस्तान में कैसे चलता है सरकारी खेल?

पाकिस्तान की नींव रखने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को वहां ‘कायदे-आजम’ कहा जाता है। लेकिन जिन्ना को लेकर एक दिलचस्प सवाल अक्सर उठता है—क्या शराब पीने और पोर्क खाने वाले जिन्ना को मुसलमानों ने कैसे अपना नेता माना? इसका जवाब कहीं न कहीं ‘वक्फ’ की बहस में भी छुपा है।

सद्दाम हुसैन

सद्दाम हुसैन: तानाशाह का आख़िरी ठिकाना बना 8 फीट गहरा गड्ढा

सद्दाम हुसैन… नाम सुनते ही जहन में एक तानाशाह की तस्वीर बनती है, जिसने करीब तीन दशक तक इराक पर दहशत और लोहे की मुट्ठी से राज किया। लेकिन कभी खुद को अजेय समझने वाला यह शासक आखिरकार एक छोटे से गड्ढे में छिपा मिला। आज हम जानेंगे उस दिन

अयातुल्ला खुमैनी का भारतीय कनेक्शन

अयातुल्ला खुमैनी की अनसुनी भारतीय कहानी | खुमैनी का भारत कनेक्शन

20वीं सदी में जब भी दुनिया की सबसे बड़ी क्रांतियों की बात होती है, तो ईरान की इस्लामिक क्रांति और उसके अगुआ अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी का नाम जरूर लिया जाता है। खुमैनी ने न सिर्फ ईरान की सूरत बदल दी, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति पर गहरा असर डाला। लेकिन

मुअम्मर गद्दाफी

600 गाड़ियों का काफिला, महिला बॉडीगार्ड और तंबू—गद्दाफी की सनक की पूरी कहानी!

लीबिया के कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का नाम सुनते ही ज़ेहन में एक विरोधाभासी छवि उभरती है। कभी वह गरीबों का हमदर्द नज़र आते हैं, कभी सनकी तानाशाह। उनकी ज़िंदगी में सत्ता, क्रांति, सनक और विवाद ऐसे गुथे हुए हैं कि यह समझना मुश्किल हो जाता है—आखिर असली गद्दाफी कौन थे?

अंबूबाची महायोग 2025

अंबूबाची महायोग 2025: जब मां कामाख्या करती हैं विश्राम, ब्रह्मपुत्र बदलता है रंग

जहां देवी स्वयं विराजमान हैं, वहां हर क्षण होता है अद्भुत असम के गुवाहाटी स्थित नीलांचल पर्वत पर विराजमान मां कामाख्या का मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रहस्यों, तंत्र साधना और चमत्कारों की भूमि है। हर साल यहां आयोजित होने वाला अंबूबाची महायोग 2025 देश-दुनिया के श्रद्धालुओं, साधकों,

ChatGPT का साइड इफेक्ट

ChatGPT का साइड इफेक्ट: बच्चों की सोचने की क्षमता पर बुरा असर, जानिए MIT की स्टडी

आजकल भारत में ChatGPT और AI टूल्स का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। बच्चे से लेकर युवा तक हर कोई पढ़ाई, प्रोजेक्ट और निबंध लिखने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह सुविधा आपके बच्चों के दिमाग पर क्या असर

इमरजेंसी 1975

1975 की इमरजेंसी: भारत का वो दौर जब लोकतंत्र खतरे में था

1975 की इमरजेंसी: भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय, जो भारत को ‘चीन’ बना सकता था भारत के इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद की जाती है। आज उस आपातकाल (Emergency) को पूरे 50 साल पूरे हो चुके हैं। 1975 से 1977

श्रीशैलम मंदिर से मिला भारत का सबसे पुराना धूमकेतु (कॉमेट) रिकॉर्ड

1456 का धूमकेतु और आंध्रप्रदेश का श्रीशैलम मंदिर: इतिहास की खोई हुई कड़ी

हाइलाइट्स:✔️ आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम मंदिर में मिला 1456 CE का ताम्रपत्र✔️ हेलीस कॉमेट के ऐतिहासिक दर्शन का सबसे पुराना भारतीय उल्लेख✔️ श्रीशैलम मंदिर: जहां एक साथ स्थित हैं ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ✔️ कॉमेट्स, उल्कापिंड और उल्का वर्षा का वैज्ञानिक व पौराणिक महत्व हेलीस कॉमेट का सबसे पुराना भारतीय रिकॉर्ड मिला