दिल्ली ब्लास्ट के बाद बड़ा कदम: रॉ प्रमुख पराग जैन को पीएम की सुरक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी

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BY: Yoganand Shrivastva

दिल्ली: हुए कार धमाके के बाद केंद्र सरकार ने सुरक्षा मोर्चे पर बड़ा फैसला लिया है। 12 नवंबर को बुलाई गई कैबिनेट बैठक में खुफिया तंत्र और वीवीआईपी सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। इसी दौरान रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के निदेशक आईपीएस पराग जैन को कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अब वे प्रधानमंत्री और अन्य वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे।

पराग जैन का अनुभव और भूमिका
पराग जैन 1989 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने पंजाब में आतंकवाद विरोधी कई अभियानों का नेतृत्व किया है। बठिंडा, मनसा और होशियारपुर में उन्होंने कई संवेदनशील ऑपरेशनों को अंजाम दिया। रॉ प्रमुख बनने से पहले वे एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) के प्रमुख भी रहे, जो हवाई निगरानी और बॉर्डर इंटेलिजेंस जुटाने का कार्य करती है।

इंटेलिजेंस जगत में उन्हें “सुपर जासूस” के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि वे HUMINT (मानव स्रोतों से जानकारी जुटाना) और TECHINT (तकनीकी माध्यमों से सूचना संग्रह) दोनों में पारंगत हैं। उनके पास न सिर्फ मजबूत ग्राउंड नेटवर्क है, बल्कि तकनीकी निगरानी तंत्र की गहरी समझ भी है।

नई जिम्मेदारी क्यों अहम है
12 नवंबर को जारी आदेश के अनुसार, पराग जैन को कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) नियुक्त किया गया है। यह पद स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के प्रशासनिक प्रमुख का होता है — वही एजेंसी जो प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा संभालती है। यह जिम्मेदारी जुलाई से खाली थी।

सुरक्षा सचिव का काम सिर्फ पीएम की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों के समन्वय, विभिन्न खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी होता है।

ऑपरेशन सिंदूर में भी निभाई थी अहम भूमिका
पराग जैन की पहचान एक रणनीतिक और सटीक खुफिया अधिकारी के रूप में है। उन्होंने हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भी अहम भूमिका निभाई थी, जहां उनकी नेतृत्व क्षमता और जमीनी जानकारी जुटाने की दक्षता की सराहना की गई थी।

दिल्ली ब्लास्ट के बाद उनकी यह नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब देश की शीर्ष सुरक्षा व्यवस्था एक अनुभवी खुफिया अधिकारी के हाथों में है, जो फील्ड और टेक्निकल दोनों स्तरों पर स्थिति को समझने की क्षमता रखते हैं।

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