BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर, ग्वालियर पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद को CBI अधिकारी, गृह मंत्रालय का अफसर और यहां तक कि कैबिनेट मंत्री तक घोषित कर रखा था। हैरानी की बात यह है कि ये शख्स महज 12वीं फेल है और अपनी ठगी की स्किल इंटरनेट से सीखी है। आरोपी मेट्रिमोनियल साइट्स से लड़कियों के नंबर निकालता और उनके परिवारों को अपना रुतबा दिखाकर लाखों की ठगी करता था।
ठग का नाम और चालबाजियां
गिरफ्तार आरोपी का नाम मनोज श्रीवास उर्फ मोहित सिंह शेखावत है। उसने मेट्रिमोनियल साइट्स से युवतियों की प्रोफाइल खंगाली और फिर संपर्क कर खुद को CBI का अधिकारी, मंत्री का भतीजा या मंत्रालय से जुड़ा अफसर बताकर विश्वास जमाया।
वह लग्जरी गाड़ी में हूटर और फर्जी मंत्रालय की नेम प्लेट लगाकर लड़कियों के घर पहुंचता और वहां शादी या नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठ लेता था।
कैसे हुआ खुलासा?
4 जुलाई को ग्वालियर के बजरिया स्थित एक मॉल में ठगी की शिकायत के बाद पुलिस ने मनोज को गिरफ्तार किया। उसने एक युवक से फूड इंस्पेक्टर बनवाने के नाम पर 9 लाख रुपये की ठगी की थी।
जांच में खुलासा हुआ कि उसकी पीड़िता से पहचान मेट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी। वहीं, उसकी बहन के माध्यम से पीड़ित परिवार से रिश्ता जोड़ने की कोशिश की गई थी।
पोस्टरबाजी से फैलाई थी झूठी शान
मनोज ने भिंड जिले के गोहद क्षेत्र में खुद को मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजन वित्त विकास निगम का कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त बताकर सड़कों पर पोस्टर और होर्डिंग्स लगवा दिए थे।
इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की तस्वीरें तक लगाई गईं थीं। जब भाजपा नेताओं की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी तो शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई।
फर्जी दस्तावेज और आईडी कार्ड
पूछताछ में सामने आया कि मनोज ने CBI अफसर मोहित सिंह शेखावत के नाम से फर्जी आईडी कार्ड बनवाया था। उसके पास से कई फर्जी वाहन नेम प्लेट, मंत्रालयों की नेम प्लेट और सरकारी संस्थानों के कार्ड मिले हैं।
इन सभी का निर्माण इंटरनेट पर मौजूद सैंपल और यूट्यूब ट्यूटोरियल देखकर किया गया था।
कई राज्यों में फैलाया जाल
ग्वालियर पुलिस के अनुसार, आरोपी सिर्फ मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आगरा में भी एक परिवार को अपना शिकार बना चुका है। वहां भी उसने शादी का झांसा देकर 4 लाख रुपये की ठगी की थी।
तीन दिन की रिमांड पर आरोपी
पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर तीन दिन की रिमांड पर लिया है। अधिकारी मानते हैं कि आरोपी की ठगी का दायरा और बड़ा हो सकता है।
सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि उसके खिलाफ भिंड, ग्वालियर, आगरा सहित अन्य स्थानों पर ठगी और धोखाधड़ी के केस दर्ज हैं, और पूछताछ में कई नए पीड़ित सामने आ सकते हैं।
इंटरनेट बना हथियार, अपराध बना करियर
मनोज ने स्वीकार किया कि वह 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं कर सका, लेकिन यूट्यूब और इंटरनेट से फर्जी आईडी बनाना, अफसरों की भाषा बोलना, नाम और विभाग घड़ना जैसे स्किल्स सीख लिए थे।
उसने यह भी कबूला कि वह अक्सर क्राइम सीरियल और पुलिस डिटेक्टिव शो देखकर योजनाएं बनाता था।
लड़कों की तरह, पर ठग निकला!
मनोज जिस प्रोफाइल से युवतियों के परिजन से संपर्क करता था, उसमें वह खुद को प्रतिष्ठित मंत्रालय से जुड़ा बताता और कहता कि उसके पास मंत्रालय में जॉब, ठेका और पद दिलाने की ताकत है। इस झांसे में कई परिवार आ गए और अपनी बेटियों की शादी या नौकरी के लालच में लाखों रुपये गंवा बैठे।
ग्वालियर पुलिस की सतर्कता से एक शातिर साइबर-ठग सलाखों के पीछे पहुंचा है, लेकिन उसकी हरकतों ने यह साफ कर दिया कि कैसे शिक्षा की कमी और इंटरनेट का गलत इस्तेमाल मिलकर एक आम व्यक्ति को क्राइम की दुनिया में ले जा सकते हैं। पुलिस अब अन्य राज्यों में भी उसकी ठगी की छानबीन कर रही है।





