BY
Yoganand Shrivastava
Bhopal : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। यहाँ एक अस्पताल के डॉक्टर ने जिस नवजात बच्ची को मृत घोषित कर उसका ‘डेथ सर्टिफिकेट’ तक जारी कर दिया था, वह दफनाने की तैयारी के बीच जीवित निकली। इस घटना ने जहाँ परिवार की खुशियों को दोबारा लौटा दिया है, वहीं अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही की कलई खोल दी है।
Bhopal खुशी, मातम और फिर ‘जिंदगी’ की वापसी
परिजनों के अनुसार, यह पूरी घटना शुक्रवार सुबह की है:
- जन्म: बच्ची का जन्म सुबह करीब 7:00 से 7:30 बजे के बीच हुआ था।
- लापरवाही: जन्म के कुछ ही देर बाद, यानी सवा 8 बजे ड्यूटी डॉक्टर ने बच्ची की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, औपचारिकताएं पूरी करते हुए तुरंत मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) भी परिजनों के हाथ में थमा दिया गया।
- मातम: बच्ची की मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। परिजनों ने भारी मन से अंतिम विदाई की तैयारी शुरू कर दी और दफनाने के लिए कफन तक खरीद लिया गया।
Bhopal 4 घंटे बाद हुआ ‘चमत्कार’
करीब चार घंटे बाद, जब परिजन अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने वाले थे, तभी बच्ची के शरीर में अचानक हलचल महसूस हुई। जब ध्यान से देखा गया तो उसकी सांसें चल रही थीं। आनन-फानन में उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ अब उसका इलाज जारी है।
Bhopal परिजनों का फूटा गुस्सा
बच्ची के जीवित मिलने के बाद परिवार वालों ने अस्पताल और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिजनों का सवाल है कि:
- आखिर किस आधार पर डॉक्टर ने जीवित बच्ची का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया?
- क्या बिना ईसीजी या अन्य महत्वपूर्ण जांच के ही नवजात को मृत मान लिया गया?
- अगर परिवार वाले समय रहते हलचल न देखते, तो इस लापरवाही का अंजाम क्या होता?





