रिपोर्ट-अनिरुद्ध सोनोन, एडिट- विजय नंदन
भोपाल: मध्य प्रदेश के पांच बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में आज से दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यह नियम पहले से मौजूद था, लेकिन अब ट्रैफिक पुलिस ने इसे सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। 300 रुपए का चालान, 4 साल से ऊपर के बच्चे भी नियम के दायरे में आएंगे। नए अभियान के तहत यदि ड्राइवर के पीछे बैठा व्यक्ति हेलमेट नहीं पहनता है, तो 300 रुपए का चालान काटा जाएगा। यह नियम चार साल की उम्र से अधिक के सभी लोगों पर लागू होगा। भोपाल में अभियान के पहले ही दिन पुलिस ने 20 से अधिक पॉइंट्स पर चेकिंग अभियान चलाकर चालानी कार्रवाई की।

शहरों में हंगामा, पुलिस और लोगों के बीच बहस
भोपाल में जगह-जगह ट्रैफिक पुलिस और दोपहिया चालकों के बीच जमकर नोकझोंक भी देखने को मिली। कई लोगों ने सवाल उठाया कि पुलिसकर्मी सामने से गुजरे लेकिन चालान नहीं किया गया। वहीं, कुछ स्थानों पर हेलमेट नहीं पहनने वालों ने नियम को लेकर बहानेबाजी भी की। स्वदेश न्यूज़ की टीम ने भोपाल के एमपी नगर चौराहे पर हेलमेट चेकिंग अभियान का रियलिटी चेक किया। मौके पर देखा गया कि ज्यादातर लोग नए नियम से अनजान थे और अचानक की गई कार्रवाई से अफरा-तफरी मच गई। सवाल ये है कि सरकार को ये सख्ती क्यों करनी पड़ रही है, दरअसल सड़क दुर्घटना में मौत के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। हर साल सड़क हादसों में सबसे ज्यादा बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चालकों को मौत हो रही है, इतना ही नहीं वाहन के पीछ बैठने वाले भी इसके हादसे में मौत के शिकार बन रहे हैं। सरकार की कोशिश इस सख्ती से इन आंकड़ों को कम करना है। क्योंकि ये आंकड़े डरावने हैं..

राजधानी भोपाल में सड़क हादसों से जुड़ी एक रिपोर्ट ने प्रशासन और जनता दोनों को चौंका दिया है. सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के समक्ष पेश की गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि बीते 5 वर्षों में 900 से अधिक लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाई, जिनमें से 543 लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था. बीते 5 सालों में 900 से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई है, जिनमें से करीब 70% यानी 543 लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था. ये चौंकाने वाला डेटा सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के समक्ष पेश किया गया.
मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटना की वजह से हर साल करीब 14 हजार लोगों की जान चली जाती है. इसमें 53 प्रतिशत मौत दो पहिया वाहन चालकों की होती है. जिसका बड़ा कारण टू व्हीलर चालकों का हेलमेट नहीं पहनना है.

देश में बेहेलमेट वाहन चालकों के आंकड़े डराते हैं
भारत में हर साल बिना हेलमेट पहने मरने वालों की संख्या हजारों में है, जो सड़क सुरक्षा की एक गंभीर चिंता को उजागर करती है। 2021 में लगभग 47,000 लोगों की मौत हेलमेट न पहनने के कारण हुई थी, जबकि 2022 में यह संख्या बढ़कर 52,000 से अधिक हो गई है। यह संख्या हर दिन लगभग 80 लोगों के बराबर है।
2021: 47,000 मौतें (आंकड़े सरकारी रिपोर्टों पर आधारित, जिसमें बिना हेलमेट वाले सवार और पीछे बैठे लोग शामिल हैं)।
2022: 52,000 से अधिक मौतें।
दैनिक औसत: हेलमेट न पहनने के कारण औसतन 80 मौतें होती हैं।
चोटों का जोखिम: 2022 में, हेलमेट न पहनने के कारण घायल होने वाले लोगों की संख्या 1.01 लाख से अधिक थी, जिसमें से कई की हालत गंभीर थी और कई कोमा में चले गए थे।





